सलामतपुर। गल्ला मंडी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। राष्ट्रीय कथा व्यास पंडित देवेन्द्र भार्गव महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध से रुक्मणि विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणि ने बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार किया था, जबकि उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्मणि ने ब्राह्मण के माध्यम से कृष्ण को संदेश भेजा। कृष्ण कुंडिनपुर पहुंचे, रुक्मणि का हरण कर उन्हें द्वारका ले गए और विधि-विधान से विवाह संपन्न हुआ। महाराज ने कहा, सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। कथा में भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण के साथ श्रद्धालुओं ने सुख-शांति की कामना की।
