बंगलादेश के नये विदेश मंत्री बने खलीलुर रहमान: अराकान कॉरिडोर पर संकेत?

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (वार्ता) बंगलादेश के नये प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान के मंत्रिमंडल में खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री बनाये जाने को देश के कूटनीतिक हलकों में विदेश नीति की ‘सावधानीपूर्वक पुनर्संतुलन प्रक्रिया’ के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले वह अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) रह चुके हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वह पश्चिमी नीति-निर्माण हलकों में सहज माने जाते हैं और उन्हें अमेरिकी प्रशासन के करीब समझा जाता है। ऐसे समय में यह तथ्य अहम माना जा रहा है, जब बंगलादेश अमेरिका के साथ एक असंतुलित माने जा रहे व्यापार समझौते के बीच अपने संबंधों को साधने की कोशिश कर रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष एनएसए के रूप में उनकी नियुक्ति उस समय बीएनपी नेतृत्व के कड़े विरोध के बावजूद हुई थी। भारत के पूर्व उच्चायुक्त पिनाक आर. चक्रवर्ती ने कहा, “ यह आश्चर्यजनक है कि बीएनपी का हिस्सा न होने के बावजूद खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री बनाया गया है। वह तथाकथित टेक्नोक्रेट कोटे से आये हैं। उनकी नियुक्ति से संकेत मिलता है कि तारिक रहमान के कार्यकाल में भी अमेरिकी प्रभाव बना रहेगा। ” भारत ने आधिकारिक तौर पर उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वह आपसी प्रगति और समृद्धि के लिए सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ काम करने को उत्सुक हैं।

मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान खलीलुर रहमान रोहिंग्या मुद्दे पर मुख्य सलाहकार के उच्च प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उन्हें उन प्रभावशाली आवाज़ों में शामिल माना जाता है, जिन्होंने ‘अराकान कॉरिडोर’ के निर्माण की वकालत की थी। यह एक मानवीय मार्ग होगा, जो चटगांव से होकर म्यांमार के रखाइन राज्य तक सहायता पहुंचाने में मदद करेगा। समर्थकों का कहना है कि यह गलियारा मानवीय और रणनीतिक दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करेगा तथा लंबे समय से चले आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी संकट को लेकर बंगलादेश पर बने अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम कर सकता है। आलोचकों का मानना है कि इससे संप्रभुता, सुरक्षा जोखिम और म्यांमार के आंतरिक संघर्ष में गहराई से उलझने की आशंका बढ़ सकती है। श्री चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि खलीलुर रहमान हालिया बंगलादेश-अमेरिका व्यापार समझौते को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं और इसी कारण वह नयी बीएनपी सरकार के लिए मूल्यवान बने रहेंगे, जो भविष्य में बेहतर शर्तें हासिल करने की कोशिश करेगी। हाल में हस्ताक्षरित व्यापार समझौते के तहत बंगलादेश के वस्त्र उद्योग को कुछ राहत मिली है, क्योंकि शुल्क घटाये गये हैं और अमेरिकी कच्चे माल से बने परिधानों पर शून्य शुल्क का वादा किया गया है। समझौते में बंगलादेश द्वारा अमेरिका से अधिक मात्रा में वस्तुएं खरीदने की प्रतिबद्धता भी है। साथ ही यह शर्त भी है कि बंगलादेश ऐसे किसी देश से परमाणु रिएक्टर, ईंधन रॉड या संवर्धित यूरेनियम नहीं खरीदेगा, जो ‘अमेरिका के महत्वपूर्ण हितों को नुकसान पहुंचाता हो।’ विश्लेषकों के अनुसार, बंगलादेश की विदेश नीति इस समय नाजुक मोड़ पर है। भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ बंगलादेश को चीन के हितों को भी संतुलित करना होगा। क्षेत्र में बीजिंग के प्रभाव को सीमित करने की मंशा रखने वाले अमेरिका ने हाल ही में बंगलादेश में नियुक्त अपने राजदूत ब्रेंट टी क्रिस्टेनसेन के माध्यम से चीन के साथ कुछ प्रकार की भागीदारी के जोखिमों को लेकर चेतावनी भी दी है। साथ ही, म्यांमार के साथ संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। रोहिंग्या प्रत्यावर्तन प्रक्रिया ठप पड़ी है और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि जिस मानवीय गलियारे की अवधारणा को नये विदेश मंत्री कभी समर्थन देते माने गये, वह केवल विचार तक सीमित रहती है या व्यवहार में भी उतरती है।

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