नयी दिल्ली 18 फरवरी (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले वह सम्मेलन में भाग लेने वाले विभिन्न देशों के नेताओं का बुधवार शाम को भारत मंडपम में स्वागत करेंगे। सम्मेलन के अवसर पर प्रधानमंत्री कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि श्री मोदी सुबह इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन सत्र में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री के अलावा उद्घाटन सत्र को फ्रांस के राष्ट्रपति एनैमुअल मैक्रों, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव तथा विश्वभर के उद्योग जगत के प्रमुख नेता भी संबोधित करेंगे। उद्घाटन सत्र के बाद प्रधानमंत्री अन्य नेताओं के साथ इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो का भ्रमण करेंगे जहां वह विभिन्न देशों के पवेलियन का अवलोकन करेंगे। दोपहर को वह ‘लीडर्स प्लेनरी’ में भाग लेंगे। इसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री और बहुपक्षीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एआई से जुड़े राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं—जैसे शासन व्यवस्था, अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विचार रखेंगे। शाम को प्रधानमंत्री कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की गोलमेज बैठक में भाग लेंगे। इसमें वैश्विक प्रौद्योगिकी और उद्योग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी सरकार के नेतृत्व के साथ निवेश, अनुसंधान सहयोग, आपूर्ति शृंखलाओं और एआई प्रणालियों के उपयोग पर चर्चा करेंगे।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की विषय वस्तु “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” अर्थात सभी के कल्याण और सभी के सुख के लिए है। इसका उद्देश्य भारत को एआई के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है तथा ऐसा भविष्य सुनिश्चित करना है जहां एआई मानवता की उन्नति, समावेशी विकास और हमारे साझा ग्रह की सुरक्षा को प्रोत्साहित करे। यह सम्मेलन तीन स्तंभों—लोग, गृह और प्रगति—पर आधारित सात कार्य समूहों द्वारा संचालित होगी। ये समूह विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभाव को दर्शाने वाले ठोस परिणामों पर कार्य करेंगे। ये सात विषय आर्थिक वृद्धि और सामाजिक कल्याण के लिए एआई, एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और विश्वसनीय एआई, जनशक्ति, विज्ञान, तथा लचीलापन, नवाचार और दक्षता हैं। इस सम्मेलन में 500 से अधिक वैश्विक एआई प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिनमें सीईओ, संस्थापक, 150 शिक्षाविद एवं शोधकर्ता आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि, जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष तथा लगभग 60 मंत्री और उपमंत्री भी इसमें भाग लेंगे।

