दीव, 08 जनवरी (वार्ता) मणिपुर के वहेंगबाम सुधीर मीतेई ने केआईबीजी 2026 की पेंचक सिलाट स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 19 वर्षीय सुधीर ने न केवल चुनौतियों पर काबू पाया, बल्कि प्रेमचंद्र येन्गखोम के साथ मिलकर गंडा स्पर्धा में मणिपुर को खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में राज्य का पहला स्वर्ण पदक भी दिलाया। मुकाबले के बाद सुधीर ने कहा, “यह मेरा पहला खेलो इंडिया बीच गेम्स था और आने से पहले मैंने अपने माता-पिता से वादा किया था कि मैं स्वर्ण पदक लेकर लौटूंगा। फाइनल के दौरान कुछ पल ऐसे थे जब घबराहट हुई, क्योंकि माता-पिता से हुई सारी बातें मेरे दिमाग में चल रही थीं। लेकिन मुझे खुशी है कि मैं गोल्ड जीत सका।”
सुधीर के मुताबिक, दीव का अनुभव उनके करियर की अब तक की सबसे कठिन परीक्षा था। वह कहते हैं, “हम आमतौर पर रेत पर प्रदर्शन करने के आदी नहीं हैं, इसलिए यह एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन यह एक नया अनुभव था और मैंने हर पल का आनंद लिया। मैंने हमेशा खेलो इंडिया मंच के बारे में सुना था, लेकिन इसे खुद अनुभव करना बेहद खास रहा। और स्वर्ण पदक के साथ लौटना इसे और भी यादगार बना देता है।”
इंफाल की प्रसिद्ध नवांग स्पोर्ट्स अकादमी के प्रशिक्षित खिलाड़ी सुधीर उसी संस्थान से निकले हैं, जिसने भारत को गंडा इवेंट में बिशन और जॉनसन के रूप में एकमात्र अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता दिए हैं। 2018 में सीनियर खिलाड़ियों से प्रेरित होकर सुधीर ने पेंचक सिलाट शुरू किया और जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने जूनियर नेशनल्स में 45-50 किग्रा टांडिंग श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता, फिर 2021 में 50-55 किग्रा वर्ग में भी स्वर्ण अपने नाम किया। 2022 के नॉर्थ ईस्ट गेम्स में रजत पदक के साथ उनका शानदार सफर जारी रहा, लेकिन इसके बाद किस्मत ने कड़ा इम्तिहान लिया।

