बातों के बतासे और खाली डिब्बा जैसा है मप्र सरकार का बजट: नारायण पट्टा

मंडला। बुधवार को विधानसभा में प्रस्तुत हुए मप्र सरकार के मुख्य बजट को लेकर बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार का आज का बजट जनता युवाओं किसानों महिलाओं से विश्वासघात वाला बजट है। वित्त मंत्री ने आज जो बजट पेश किया है उसमें सिर्फ बातों के बताशे बनाए गए हैं और जनहित का मुद्दा पूरी तरह सफाचट है। यह बजट खाली डिब्बे जैसा है जो आवाज तो बहुत करता है लेकिन उसके अंदर होता कुछ नहीं। नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश की जनता और मतदाताओं से जो प्रमुख वादे किए थे, वह सारे वादे ढाई साल बाद भी वित्त मंत्री के बजट भाषण से ग़ायब दिखाई दिए। प्रदेश के किसानों, नारी शक्ति, नौजवानों और सभी वर्गों से किए गए चुनावी वादों को बजट में कोई स्थान नहीं दिया गया। विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश की जनता से जो चार प्रमुख वादे किए थे, उनमें किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रुपया प्रति क्विंटल देना,किसानों को गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2700 रुपया प्रति क्विंटल देना,लाड़ली बहन योजना में महिलाओं को प्रति महीने 3 हज़ार रुपया देना, घरेलू गैस सिलेंडर 450 रुपये में देना शामिल था लेकिन बजट में इनका जिक्र तक नहीं है। बजट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सरकार जनविरोधी है, जनता से विश्वासघात करने वाली है और वादा-खिलाफी इसका स्वभाव है। इस बजट से मध्य प्रदेश की जनता को भारी निराशा हुई है।इसके अलावा वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि पिछले बजट में जो घोषणाएं की गई थीं, उनको पूरा क्यों नहीं किया गया। वित्त मंत्री ने यह भी नहीं बताया कि आख़िर केंद्र सरकार से अगले पाँच साल में मिलने वाले करों की हिस्सेदारी में 50 हज़ार करोड़ रुपये की कमी पर सरकार की क्या रणनीति है। इसके अलावा केंद्र और राज्य के सहयोग से चलने वाली योजनाओं में चालू वित्त वर्ष में मध्य प्रदेश को केंद्र सरकार की ओर से कई हज़ार करोड़ की राशि का भुगतान नहीं किया गया। इन विभिन्न पहलुओं को देखते हुए साफ़ समझ में आता है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार प्रदेश की जनता के हित को ध्यान में नहीं रख रही है और केंद्र सरकार की कठपुतली के रूप में प्रदेश की जनता के हित को केंद्र के हाथों में गिरवी रख दिया है। मनरेगा का पिछले साल की 704 करोड़ रूपए की राशि अबतक केंद्र सरकार से नहीं मिली है वहीं अबतक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार मनरेगा में कितना खर्च करेगी। आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए इस बजट में कोई नए प्रावधान नहीं हैं। कुल मिलाकर यह बजट पूरी तरह निराशाजनक और आम जनता से धोखा करने वाला बजट है।

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