नयी दिल्ली, 18 फरवरी (वार्ता) दलित इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को समावेशी विकास का उपकरण बनाने की मांग करते हुए बुधवार को कहा कि दलित और आदिवासियों के विकास के बिना विकसित भारत नहीं बन सकता। चैम्बर के यहां “समावेशन के लिए एआई एवं रोजगार का भविष्य” विषय पर आयोजित सम्मेलन में डिक्की के संस्थापक चेयरमैन मिलिंद कांबले ने यह सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया कि एआई सशक्तिकरण का जरिया बने न कि पहले से मौजूद सामाजिक खाई को बढ़ाने का। उन्होंने कहा कि अब तक देश ने काफी तरक्की की है, अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इससे बने अवसरों का समान वितरण नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “हमें सांकेतिक समावेशन से ढांचागत समावेशन की बढ़ना चाहिए। क्या समाज के पिछड़े वर्ग को शामिल किये बिना भारत विकसित हो सकता है? विकसित भारत की यात्रा में विकसित दलित और विकसित आदिवासी की यात्रा को भी शामिल करना चाहिये।”
श्री कांबले ने कहा कि जब दलित और आदिवासी आगे बढ़ेंगे, तभी भारत आगे बढ़ेगा। उन्होंने आह्वान किया कि साल 2047 में देश के विकास का पैमाना सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की जगह गरिमा हो। उन्होंने कहा कि इस खाई को पाटने के लिए शिक्षा, वित्त तक पहुंच और समावेशन जरूरी है। एआई पर फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय की विशेष दूत एनी बुव्रो ने कहा कि भारत एआई क्रांति में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। आईआईएम जम्मू के संस्थापक निदेशक प्रो. बी.एस. सहाय ने कहा कि जब तक लोगों को एआई के बारे में शिक्षित नहीं किया जायेगा, वे इसका लाभ नहीं ले सकेंगे। चीजें तेजी से बदल रही हैं। एआई को लेकर चुनौतियां भी हैं, लेकिन यह कई अवसर भी लेकर आता है। यह डर गलत है कि इससे रोजगार समाप्त हो जायेंगे। इससे सुदूर गांवों के लोगों को भी सूचना तक पहुंच मिलेगी और छोटे उद्यमियों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी।
उन्होंने बताया कि आईआईएम जम्मू, इसी साल स्नातकोत्तर स्तर पर एआई में एक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। साथ ही, स्नातक स्तर पर भी एक कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध होगा। आईक्रिएट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अविनाश पुणेकर ने कहा कि एआई ने सामाजिक खाई को पाटने की बजाय पहले से मौजूद खाई को और चौड़ा किया है। जिस प्रकार बच्चों को सिखाते समय यह देखा जाता है कि उसे क्या सिखाना है और क्या नहीं, एआई के बारे में भी उसी तरह का रुख अपनाना होगा। कार्यक्रम को भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक एआई वैश्विक जीडीपी में 15.7 लाख करोड़ डॉलर का योगदान देगा।

