ढाका | बांग्लादेश में मंगलवार को नई सरकार के गठन के साथ ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। पूर्व अंतरिम सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) रहे डॉक्टर खलीलुर्रहमान को देश का नया विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है। अमेरिका समर्थक माने जाने वाले खलीलुर्रहमान को सांसद न होने के बावजूद ‘टेक्नोक्रेट’ कोटे से यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति किसी बड़ी ‘अंतरराष्ट्रीय डील’ का हिस्सा हो सकती है, क्योंकि खलील ने हाल ही में अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील और बोइंग विमान सौदे में अहम भूमिका निभाई थी।
खलीलुर्रहमान की नियुक्ति ने बांग्लादेशी सेना और सरकार के बीच तनाव की लकीरें खींच दी हैं। दरअसल, खलील और आर्मी चीफ जनरल वकार-उज-जमां के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है। विवाद की शुरुआत मई 2025 में म्यांमार कॉरिडोर को लेकर हुई थी, जिसे आर्मी चीफ ने ‘खूनी कॉरिडोर’ करार दिया था। स्थिति इतनी गंभीर है कि ढाका कैंटोनमेंट में खलीलुर्रहमान के प्रवेश पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। सेना प्रमुख को कमजोर करने के लिए खलील द्वारा समर्थित अफसरों की नियुक्तियों के प्रयासों ने इस विवाद को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदल दिया है।
विदेश मंत्री जैसे शक्तिशाली पद पर खलील की वापसी से जनरल जमां के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि वे सीधे तौर पर सैन्य ऑपरेशंस में दखल नहीं दे पाएंगे, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर वे सेना के प्रभाव को कम करने का प्रयास कर सकते हैं। विशेषज्ञ इसे ‘आग से खेलने’ जैसा कदम बता रहे हैं, क्योंकि इससे देश में नागरिक सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच सीधा टकराव होने की आशंका है। जून 2027 में आर्मी चीफ के रिटायर होने तक ढाका की सत्ता में शक्ति संतुलन को लेकर खींचतान जारी रहने की संभावना है, जो बांग्लादेश की स्थिरता के लिए नई चुनौती बन सकती है।

