पं. मिश्रा का कर्ज उतारने आया हूं: शास्त्री

सीहोर। कुबेरेश्वर धाम पर कथा श्रवण करना बहुत पुण्यकारी होता है. पं. मिश्रा की कथा अपने शहर में सुनना भाग्य है, लेकिन कुबेरेश्वर धाम आकर सुनना परम सौभाग्य है. उन्होंने भक्तों को हनुमान और शिव की भक्ति का मार्ग दिखाया. अप्रैल में यहां भव्य प्राण- प्रतिष्ठा समारोह होने जा रहा है. हमने यहां आकर पं. प्रदीप मिश्रा का कर्ज उतार दिया है. वह हमारे यहां बेटियों के विवाह सम्मेलन में आए थे. हम आज कथा श्रवण करने आ गए. हम किसी का कर्ज नहीं रखते फिर पं. मिश्रा तो हमारे बड़े हैं. उनका कर्ज हम कैसे रख सकते हैं.

उक्त उद्गार बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने मंगलवार को कुबेरेश्वर धाम में आयोजित शिव महापुराण आयोजन में शामिल होकर व्यक्त किए. उन्होंने भाव विभोर होते हुए कहा कि पं. प्रदीप मिश्रा जैसे संत जब जन्म लेते हैं तो वह स्वयं परमात्मा की ओर चलते हैं साथ ही करोड़ों लोगों को भी परमात्मा की राह पर ले जाते हैं. कुबरेश्वर धाम पर पहुंचे पं. धीरेन्द्र शास्त्री को देखने व सुनने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद थी. कथास्थल पर जैसे ही पं. प्रदीप मिश्रा के साथ पं. धीरेन्द्र शास्त्री पहुंचे पूरा पांडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा.

जहां बड़े जाते हैं वहां छोटे अवश्य जाते हैं

कुबरेश्वर धाम पर उमड़े अपार जनसैलाब को संबोधित करते हुए पं. शास्त्री ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा बोला राम कृष्ण हरी, दुश्मनों की ठठरी, यह सुनकर समूचा पांडाल ठहाकों से गूंज उठा. बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. शास्त्री ने पं. प्रदीप मिश्रा को अपने से बड़ा बताते हुए कहा कि जहां बड़े जाते हैं वहां छोटे भी जाते हैं. हाल ही में पं. मिश्रा डबरा में कथा करके आए हैं. वहां आज से हमारी भी कथा प्रारंभ हो रही है. धाम पर लगभग एक घंटे रुकने के बाद पं. शास्त्री डबरा के लिए प्रस्थान कर गए. इस दौरान उन्होंने कुबरेश्वर धाम को पवित्र भूमि कहते हुए बताया कि यहां कथाश्रवण करना पुण्यकारी होता है.

सनातन धर्म के ग्रंथों को छोडऩा उचित नहीं

कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने युवाओं से अपील की कि वे मोबाईल और लैपटॉप की दुनिया से बाहर निकलकर शास्त्रों और ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ें. अपने सनातन धर्म के ग्रंथों को छोड़कर दूसरों के पीछे भागना उचित नहीं है. पंडित मिश्रा ने सोशल मीडिया पर भ्रामक बातों से बचने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि पहाड़ से ठोकर नहीं लगती, छोटे पत्थरों से लगती है, वैसे ही छोटी-छोटी बातें घर तोड़ देती हैं.बटरफ्लाई इफेक्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि तितली के पंख फडफ़ड़ाने से दुनिया पर असर हो सकता है, तो श्रद्धा से चढ़ाई गई बेलपत्री की डंडी और जल का फल क्यों नहीं मिलेगा.उन्होंने शिवरात्रि और नवरात्रि को रात्रि से जोडऩे का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण भी समझाया. पंडित मिश्रा ने कहा कि जिस तरह रात के बाद सबेरा निश्चित है, उसी तरह संघर्ष के बाद सुख का आना भी तय है.

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