नयी दिल्ली 17 फ़रवरी (वार्ता) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के महासचिव भरत लाल ने कहा है कि मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन का दायित्व केवल सरकार ही नहीं बल्कि लोगों की भी है। एनएचआरसी का वर्ष 2026 का प्रथम द्विसाप्ताहिक ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम संपन्न हो गया है। यह कार्यक्रम दो फरवरी को आरंभ हुआ था। दूरवर्ती क्षेत्रों सहित 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 71 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्रों ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस अवसर पर श्री भरत लाल ने प्रशिक्षुओं को इंटर्नशिप पूरी होने पर बधाई देते हुए आह्वान किया कि वे इंटर्नशिप के दौरान प्राप्त ज्ञान को आत्मसात करें जिससे उनमें संवेदनशीलता और दायित्वबोध विकसित हो और वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक आदर्श नागरिक बनें। उन्होंने परिवर्तन का उत्प्रेरक बनने के लिए उनसे आत्मनिरीक्षण और कार्यों के चिंतन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन का दायित्व केवल सरकार ही नहीं बल्कि लोगों की भी है।
उन्होंने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व संवैधानिक ढांचे के स्तंभ हैं जो सभी के साथ सम्मान, गरिमा और समानता का व्यवहार सुनिश्चित करते हैं। अधिकांशतः असुरक्षित लोग परिस्थितियों के शिकार होते हैं। भिखारी, ट्रांसजेंडर, दिव्यांग जन आदि को अक्सर अपने अधिकारों और गरिमा के गंभीर उल्लंघन का सामना करना पड़ता है और उन्हें उनका अधिकार दिलाने में सहायता की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से स्कूलों का दौरा कर विद्यार्थियों में स्वच्छता, साफ-सफाई, यौन अपराधों और ऐसे अन्य मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाने को कहा जो मानवाधिकारों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे छोटे प्रयासों से ही समाज में सार्थक योगदान दिया जा सकता है।

