
ढाका। बांग्लादेश के हालिया चुनाव परिणामों ने केवल सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की कूटनीतिक दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की बड़ी जीत के बाद यह आकलन तेज हो गया है कि क्षेत्रीय संबंधों, विशेषकर भारत के साथ रिश्तों में नया अध्याय खुल सकता है।
बीते डेढ़ वर्ष में दोनों देशों के संबंध अपेक्षाकृत ठंडे रहे, लेकिन अब नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच कूटनीतिक हलकों में संभावित सुधार की चर्चा शुरू हो गई है। बीएनपी नेतृत्व की ओर से विकास, डिजिटल सहयोग और बुनियादी ढांचे पर दिए गए जोर को पड़ोसी देशों के साथ तालमेल बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पार्टी के प्रमुख चेहरे तारिक रहमान के चुनावी एजेंडे में आर्थिक आधुनिकीकरण, डिजिटल नेटवर्क विस्तार और व्यापारिक संपर्कों को प्राथमिकता दी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि ये बिंदु द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर खोल सकते हैं, खासकर तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में।
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के संभावित रुख पर क्षेत्रीय राजधानियों में करीबी नजर रखी जा रही है। वर्ष के अंत में आने वाले जल-साझेदारी और व्यापारिक समझौतों जैसे मुद्दे भी इस बदलाव के केंद्र में हैं। ऐसे में बांग्लादेश के चुनावी नतीजे केवल घरेलू राजनीति तक सीमित न रहकर दक्षिण एशिया की सामरिक और आर्थिक दिशा को प्रभावित करने वाले कारक के रूप में उभर रहे हैं।
