जबलपुर: भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष पद आगामी नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में यह नियुक्ति केवल संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति और सामाजिक संदेश का संकेत भी होगी। जबलपुर में भाजयुमो के नए अध्यक्ष कौन होगा इस पर राजनैतिक गलियारों मेें चर्चाएं तेज हो गई हैं। उधर संगठन के दावेदार अपने-अपने चहेतों के साथ भोपाल से दिल्ली के आला नेताओं के दरबार में दस्तक देने में जुट गए हैं। विदित हो कि प्रदेश संगठन को जल्द ही जिलों में अध्यक्ष पद की नियुक्ति करना है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों पहले जबलपुर आए प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के सामने अनेक नेताओं ने खामोशी से शक्ति प्रदर्शन करते हुए अपनी दावेदारी भी जताई तो वहीं कई दावेदारों ने एक-दूसरे को खुद से बेहतर बताने के लिए प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर को पोस्टर-बैनर के माध्यम से आकर्षित करने का प्रयास किया। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है दावेदार अपने अपने तरीके से अध्यक्ष पद पाने के जुगाड़ में जुट गए हैं। खबर है कि संगठन के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दरबार में शरण के साथ कई दावेदारों ने संघ कार्यालय केशव कुटी की भी शरण ली है।
लेकिन संगठन के जानकारों का स्पष्ट संदेश है कि भाजयुमो अध्यक्ष पद की दौड़ सिर्फ शक्ति प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संतुलन और संगठनात्मक समीकरण भी अहम भूमिका निभाएंगे।
इन दावेदारों के बीच है कड़ा मुकाबला
जानकारी के अनुसार दावेदारों में भाजपा युवा मोर्चा के ईशान नायक,पूर्व विधानसभा से युवा मोर्चा के मंत्री रविन्द्र तिवारी , उत्तर मध्य विधानसभा से महामंत्री रौनक अग्रवाल, पश्चिम विधानसभा से उपाध्यक्ष शुभम अरिहंत, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जय रोहाणी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से रोहन वैद्य के नाम सामने आए हैं जिनमें कोई स्थानीय विधायक का खास है तो किसी लोक निर्माण मंत्री का खास है तो किसी का पारिवारिक बैकग्राउंड बहुत तगड़ा है।
इन विशेषताओं के आधार पर होगी नियुक्ति
जानकारी के अनुसार संगठन द्वारा जमीनी पकड़, नेतृत्व में तालमेल
भविष्य की चुनावी रणनीति को समझने की शक्ति, सामाजिक व जातिगत संतुलन के साथ युवाओं में स्वीकार्यता को मद्देनजर रखते हुए भाजयुमो जबलपुर के अध्यक्ष के नाम का ऐलान करेगा। अब युवाओं की पूरी निगाहें संगठन की अंतिम घोषणा पर टिकी है। इसके अलावा संगठन उम्र की सीमा और परिवारदवाद को लेकर भी गहन चिंतन कर रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि संगठन में परिवारवाद को जगह मिलना मुश्किल होगी।
