जबलपुर: शहर में आवारा कुत्तों की संख्या करीब एक लाख के पार हो चुकी है और ऐसे में शहर में एक मात्र कठौंदा स्थित डॉग शेल्टर होम इन आंकड़ों के मुताबिक आवारा कुत्तों को संभालने में दम तोड़ते नजर आ रहा है। जानकारों व नगर निगम के जिम्मेदारों द्वारा खुद कहा जाने लगा है कि अब कठौंदा के अलावा शहर में अन्य कई जगहों पर डॉग शेल्टर होम का निर्माण कराया जाए जिससे आवारा श्वानों को पकड़कर उनका यहां बधियाकरण हो सके और इन्हें यहां सुरक्षित रखा जा सके।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2012 से नगर निगम के पास
एक ही डॉग शेल्टर होम है जो कि कठौंदा में स्थानांतरित किया गया है। शहर में आए दिन आवारा कुत्तों द्वारा लोगों को काटने के बढ़ते मामले को लेकर भी नए डॉग शेल्टर होम की दरकार अब बेहद जरूरी हो गई है। कठौंदा से पहले कछपुरा ओवर ब्रिज के नीचे डॉग शेल्टर होम बनाया गया था जिसे बाद में कठौंदा शिफ्ट किया गया था। हालांकि नगर निगम प्रशासन का दावा है कि पिछले कुछ सालों में उसने सवा 5 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर 50 हजार श्वानों की नसबंदी करवाई है। वहीं वर्ष 2012 की पशु गणना में शहर में 12 हजार आवारा श्वान थे जो कि वर्ष 2018 की गणना में 24 हजार बताए गए हैं। लेकिन वास्तविक संख्या कई गुना है। अभी नगर निगम के पास जो डॉग शेल्टर होम है उसमें मात्र 5 श्वानों की एक बार में नसबंदी की सुविधा है। इन्हें भी एक सप्ताह तक भर्ती रखना होता है।
प्रतिदिन 100 लोग हो रहे शिकार
शहर में प्रतिदिन करीब 100 लोग आवारा श्वानों के शिकार बनते हैं। इनमें से करीब कई लोग तो प्रतिदिन जिला अस्पताल विक्टोरिया पहुंचते हैं जिन्हें फ्री में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। शेष निजी अस्पतालों में ये इंजेक्शन लगवाते हैं। वहीं कामकाज से देर रात घर वापस जाने वाले साइकिल चालक, दो पहिया वाहन चालकों पर रात के वक्त आवारा कुत्ते खदेड़ते हुए हमला भी करते हैं।
इनका कहना है–
— माननीय कोर्ट के द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर हाउस में रखने निर्देशित किया है। जिसके बाद अब शहर में कठौंदा में स्थित डॉग शेल्टर होम के अलावा एक अन्य जगह शेल्टर होम की जरूरत है। निगमायुक्त को अवगत करा दिया गया है, जल्द ही नए डॉग शेल्टर होम की व्यवस्था की जाएगी।
–अंकिता बर्मन, स्वास्थ्य अधिकारी, ननि।
