ग्वालियर: नैनोमैटेरियल्स आधारित तकनीकें प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। शोधकर्ताओं को किताबी नहीं प्रैक्टिकल आधारित शोध करना चाहिए। यह बात संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्रबुद्धे ने जीवाजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ स्टडीज इन एनवायरनमेंटल कैमेस्ट्री द्वारा प्रदूषण निवारण में नैनोमैटेरियल्स के उभरते रुझान विषय पर पीएम उषा के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी कुलगुरू प्रो. जेएन गौतम ने की। विशिष्ट भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो. गजानन पाण्डेय, प्रो.एसएन महापात्रा एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. निमिषा जादौन मंचासीन रहे। इस अवसर पर प्रो. पाण्डेय ने कहा कि नैनोप्रौद्योगिकी आज पर्यावरण रसायन के क्षेत्र में गेम चेंजर सिद्ध हो रही है। नैनोमैटेरियल्स की सूक्ष्म संरचना उन्हें उच्च अवशोषण क्षमता, उत्प्रेरक सक्रियता और प्रदूषकों के प्रभावी अपघटन में सक्षम बनाती है।
प्रो. गौतम ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। निमिषा जादौन ने कहा कि पीएम उषा योजना के तहत शोध अवसंरचना को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे युवा वैज्ञानिकों को अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगी तथा शोधार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी। समापन सत्र में 32 रिसर्च पेपर के साथ 65 से अधिक शोधपत्रों का वाचन किया गया। आखिर में अतिथियों को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन विपिन जैन एवं आभार डॉ. प्रतिभा शर्मा ने व्यक्त किया।
