हैदराबाद | तेलंगाना नगर निगम और निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में कांग्रेस के प्रभुत्व को एक बार फिर साबित कर दिया है। सत्ताधारी कांग्रेस ने कुल 2,996 वार्डों में से 1,537 पर कब्जा जमाते हुए शानदार जीत दर्ज की है। सबसे बड़ा झटका पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) को लगा है, जो राज्य बनने के बाद पहली बार एक भी नगर निगम जीतने में नाकाम रही। बीआरएस ने 781 वार्डों पर जीत तो हासिल की, लेकिन सभी 7 प्रमुख नगर निगमों (कॉर्पोरेशन) से उसका हाथ धोना पड़ा, जो पार्टी के गिरते ग्राफ का संकेत है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इन चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और 336 वार्डों के साथ तीसरे स्थान पर रही है। हालांकि भाजपा कोई निगम नहीं जीत सकी, लेकिन करीमनगर में वह निर्दलीयों के सहयोग से मेयर की कुर्सी पाने की दौड़ में सबसे आगे है। इस पूरी चुनावी जीत का श्रेय मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को दिया जा रहा है, जिन्होंने ब्लॉक स्तर पर आक्रामक प्रचार किया और सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुँचाया। उनके कुशल नेतृत्व में कांग्रेस ने राज्य के 33 में से 26 जिलों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीआरएस की हार का मुख्य कारण केसीआर की चुनावी अभियान से दूरी और केटीआर व हरीश राव का सीमित प्रभाव रहा। दूसरी ओर, कांग्रेस ने 116 नगर पालिकाओं में से 66 पर निर्णायक बढ़त बनाई है, जबकि बीआरएस केवल 13 तक सिमट कर रह गई। एआईएमआईएम ने 66 वार्ड जीते हैं, वहीं गडवाल की वड्डेपल्ली नगरपालिका में फॉरवर्ड ब्लॉक ने 10 में से 8 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है। ये परिणाम स्पष्ट करते हैं कि तेलंगाना की जनता ने फिलहाल कांग्रेस के विकास मॉडल और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व पर अपनी मुहर लगा दी है।

