प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े के मामले में प्राथमिकी दर्ज

जयपुर 14 फरवरी (वार्ता) राजस्थान में कृषि मंत्री डॉ. किरोडी लाल मीणा द्वारा शुक्रवार को चूरु जिले में स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) की सालासर शाखा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े का मामला उजागर करने के बाद शनिवार को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई।

डाॅ मीणा ने बताया कि सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसलों के बीमा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े होने का मामला सामने आया है। इस संबंध में दी गई रिपोर्ट के आधार पर गंभीर आपराधिक षड्यंत्र, राजकोषीय हानि और किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई हैं। मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी गई है।

एसबीआई की सालासर शाखा के शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक (फसल बीमा पॉलिसी जारीकर्ता) एवं अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी की।

बज्जू तेजपुरा पटवार मंडल एवं ग्राम बज्जू खालसा (तहसील गजनेर, जिला बीकानेर) के विभिन्न चकों चक 11 एनबीएम 7-8 टीपीएम, 1, 2-3 टीपीएसएम, 6, 7, 8, 9 एनबीएम 6-7 एसडब्ल्यूएम, 3, 4, 5, 6 टीपीएम—की ऐसी भूमि का बीमा दर्शाया गया, जो राजस्व अभिलेखों में अस्तित्व में ही नहीं पाई गई।

तहसीलदार गजनेर, जिला बीकानेर से प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित कृषकों के नाम, सर्वे नंबर, मुरब्बा एवं खसरा नंबरों का मूल राजस्व रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ। इसके बावजूद सालासर शाखा द्वारा 71 कथित किसानों के नाम पर फर्जी कृषि भूमि दर्शाकर लगभग 13 लाख 51 हजार रुपये किसानों के प्रीमियम के रूप में जमा कराए गए। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार का अंश मिलाकर लगभग 15 लाख 76 हजार 348 रुपये राजकोष से जमा होना बताया गया है। इस प्रकार कुल क्लेम राशि लगभग नौ करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

जिन किसानों के नाम पर बीमा दर्शाया गया, उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी और न ही उनसे बीमित भूमि के कोई दस्तावेज लिए गए। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पाया गया है। सालासर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी गई है।

 

 

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