
नरसिंहगढ़। लगभग एक हजार वर्ष प्राचीन बाबा बैजनाथ बड़ा महादेव के नाम से ही शहर की पहचान है. विंध्य की सुरम्य पहाडिय़ों पर मौजूद मंदिर लोगो की आस्था का प्रमुख केंद्र है. लगभग 150 सीढ़ीयों की चढ़ाई कर श्रद्धालुजन भगवान के दर्शनों के लिए आते है. वर्षभर यहां श्रृद्धालुओं का तांता लगा रहता है. विशेषकर सावन सोमवार, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक पर्वो पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन आते है.
नगर में ऐतिहासिक महत्व के छोटा महादेव, पशुपतिनाथ जल मंदिर सहित पहाडिय़ों पर स्थित अनेक शिव मंदिरो के चलते नरसिंहगढ़ नगर को महादेव की नगरी कहा जाता है.
मंदिर का इतिहास
बड़ा महादेव मंदिर का इतिहास एक हजार वर्ष पुराना है. मंदिर की तलहटी में लोग टोपलानुमा घर बनाकर रहते थे. इसलिए इसे पहले टोपल्या महादेव के नाम से जाना जाता रहा. 16 वीं शताब्दी में रियासत के दौरान राजा-महाराजा ने मंदिर निर्माण करवाया. वर्षो पहले यहां हुए धार्मिक अनुष्ठान के दौरान संत करपात्री महाराज द्वारा इस शिवलिंग को स्वयंभू बताते हुए बाबा बैजनाथ उप ज्योर्तिलिंग की उपाधि दी गई.
