कोलकाता, 13 फरवरी (वार्ता) चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अंतिम मतदाता सूची तैयार करने में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
राज्य के जिला चुनाव अधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बैठक में आयोग की पूर्ण पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए। आयोग ने बैठक के दौरान यह चेतावनी दी कि यदि पांच साल बाद भी अंतिम सूची में किसी विदेशी नागरिक की पहचान होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित दस्तावेजों को वर्षों तक सुरक्षित रखा जाएगा।
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के साथ इस बैठक में जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ), चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) शामिल हुए। आयोग ने आगाह किया कि अंतिम सूची में किसी भी प्रकार की चूक होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी शामिल हैं। यह भी चेतावनी दी गई कि ऐसी कार्यवाही से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के दीर्घकालिक करियर की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय सूत्रों ने बताया कि कूचबिहार के जिलाधिकारी को आयोग की वेबसाइट पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित दस्तावेजों को अपलोड करने में देरी के लिए फटकार लगाई गई। इसके अलावा जलपाईगुड़ी, मालदा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर के जिलाधिकारियों की भी कथित लापरवाही को लेकर आलोचना की गई। आयोग के सूत्रों के अनुसार, पूर्व वर्धमान के जिलाधिकारी को राजनीतिक टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी गई है।
आयोग ने दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी से उन आरोपों पर स्पष्टीकरण भी मांगा है जिनमें कहा गया था कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने भांगड़ में माइक्रो-ऑब्जर्वर को धमकी दी थी। संबंधित चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के नेता के समर्थन में दी गई कथित धमकियों पर भी सवाल उठाए गए। आयोग ने पूछा कि ईआरओ और एईआरओ किस अधिकार के तहत सूक्ष्म-पर्यवेक्षकों को बुला रहे थे।
अधिकांश जिलों में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के संबंध में सुनवाई पूरी हो चुकी है और वर्तमान में दस्तावेजों का सत्यापन चल रहा है। इस उद्देश्य के लिए सूक्ष्म-पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। आयोग ने पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया कि वे जिला चुनाव अधिकारियों या पंजीकरण अधिकारियों के किसी भी उल्लंघन या अनियमितता की सूचना तुरंत दें। सुनवाई के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की गुणवत्ता पर भी गंभीर चिंता जताई गई।
अपलोड किए गए दस्तावेज कई मामलों में अपठनीय, अस्वीकार्य या अमान्य पाए गए। कुछ मामलों में समाचार पत्र की कतरनें, खाली पन्ने या धुंधली छवियों को सहायक दस्तावेजों के रूप में अपलोड किया गया था। आयोग ने सवाल किया कि ऐसे दस्तावेजों को कैसे स्वीकार किया गया और निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों की सीधी रिपोर्ट दी जाए ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके। जिला चुनाव अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से यह सत्यापित करने का निर्देश दिया गया है कि सुनवाई के दौरान जमा किए गए सभी दस्तावेजों का अनुमोदन आयोग ने किया हो।
इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सोमवार शाम 5 बजे तक की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
आयोग ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा के बाद प्रणाली में कोई भी अनधिकृत दस्तावेज पाया जाता है, तो संबंधित जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। चुनाव आयोग ने दोहराया कि वह अंतिम मतदाता सूची की शुचिता को सर्वोपरि मानता है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा।
