अब्राहम लिंकन की गरीबी से व्हाइट हाउस तक की यात्रा संघर्ष और अटूट साहस की मिसाल है। मां के निधन और कड़े परिश्रम के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और इतिहास रचा।
अक्सर अपनी रोजाना की जिंदगी में काम करते और थकते हुए हमें ऐसा महसूस होता है कि मंजिल मिलेगी या नहीं। ऐसे कठिन समय में हमें मोटिवेशन की जरूरत होती है और सफल लोगों की कहानियां हमें न सिर्फ प्रेरित करती हैं, बल्कि यह विश्वास भी दिलाती हैं कि सफलता हमसे ज्यादा दूर नहीं है।
अब्राहम लिंकन एक ऐसा ही नाम है जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है। गरीबी के अंधकार से निकलकर व्हाइट हाउस की चमक तक पहुंचने का उनका सफर हर इंसान के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
बचपन का संघर्ष और मां का साया उठना
12 फरवरी 1809 को अमेरिका के एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे अब्राहम लिंकन का बचपन बहुत ही तंगहाली में गुजरा। उनका परिवार एक छोटे से लकड़ी के घर में रहता था। हालात इतने खराब थे कि जिस जमीन पर उनका घर था, उसे लेकर भी विवाद हो गया और पूरे परिवार को दर-दर भटकना पड़ा।
जब लिंकन केवल 9 साल के थे तब उनकी मां का निधन हो गया जो उनके लिए एक गहरा आघात था। गरीबी का आलम यह था कि उनके पिता के पास उन्हें स्कूल भेजने के पैसे नहीं थे, जिसके कारण उन्हें बचपन से ही पेट पालने के लिए मजदूरी करनी पड़ी।
पढ़ने का जुनून और मेहनत
कठिन परिस्थितियों के बावजूद लिंकन के भीतर पढ़ने का जबरदस्त जुनून था। उनके पास किताबें खरीदने के पैसे नहीं थे इसलिए वे दूसरों से किताबें उधार लेकर पढ़ते थे। उन्होंने छोटी उम्र में ही अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने का फैसला किया। उन्होंने अपने पिता से बढ़ई का काम सीखा, नावें बनाईं और माल ढोने का काम किया। वे खेतों में काम करते थे और बाद में एक दुकान में नौकरी करने लगे जहां उन्हें पढ़ने का थोड़ा समय मिल जाता था।
कानून, राजनीति और दास प्रथा का अंत
लिंकन ने अपनी मेहनत के दम पर कानून की पढ़ाई की और पोस्टमास्टर के रूप में भी सेवा दी। समाज की कुरीतियों और लोगों की परेशानियों को देखकर उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया। वे विशेष रूप से अमेरिका में व्याप्त दास प्रथा को खत्म करना चाहते थे। राजनीति का सफर आसान नहीं था वो अपना पहला चुनाव हार गए और वकालत में भी उन्हें शुरुआती दौर में सफलता नहीं मिली क्योंकि वे गरीबों का केस लड़ने के लिए पैसे नहीं लेते थे।
तमाम असफलताओं और दुश्वारियों के बावजूद लिंकन ने हार नहीं मानी। उनके निरंतर संघर्ष और जज्बे ने उन्हें अमेरिका का 16वां राष्ट्रपति बनाया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक गरीब परिवार में जन्म लेना अभिशाप हो सकता है लेकिन कड़ी मेहनत से आप बुलंदियों को छू सकते हैं।
