
उज्जैन। महाकुंभ के दौरान जो समुद्र मंथन हुआ था उसमें से भगवान धन्वंतरि भी निकले थे, ऐसे में उज्जैन से उनका जुड़ाव है यही कारण है कि आयुर्वेद का एम्स हॉस्पिटल भी उज्जैन शहर में बनाया जाएगा। साथ ही भैरवगढ़ और जीवाजी गंज क्षेत्र में भी अस्पताल बनेगा। यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उज्जैन में की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए महाकाल वन मेले का शुभारंभ किया। दशहरा मैदान पर आयोजित यह मेला 11 से 16 फरवरी तक समृद्ध वन, खुशहाल जन थीम पर आयोजित हो रहा है।
कार्यक्रम में प्राकृतिक होली रंग गुलाल और महाकाल स्मृति उपहार का विमोचन किया गया। साथ ही वन विभाग की नई पहल महाकाल वन प्रसादम की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने वन विभाग की प्रदर्शनी का अवलोकन कर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और वन कर्मियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण विभाग के जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इसी अवसर पर शहर विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। सफाई व्यवस्था और अन्य कार्यों की प्रभावी मॉनीटरिंग के लिए 75 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए 170 नवीन वायरलेस हैंडसेट स्वच्छता निरीक्षकों को सौंपे गए। इस तकनीक से नगर निगम के कार्यों की रियल टाइम मॉनीटरिंग, त्वरित संवाद और कर्मचारियों की लोकेशन ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे सफाई व्यवस्था और मजबूत होगी। सफाई मित्रों का सम्मान भी किया गया।
कालिदास अकादमी परिसर में विभिन्न निर्माण कार्यों का डिजिटल भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया गया। 16 डोर टू डोर कचरा गाडिय़ों और अन्य वाहनों का लोकार्पण, रामघाट छोटा पुल पेयजल लाइन शिफ्टिंग, सीएनजी आधारित एनिमल कारकस प्लांट, नगर वन क्षिप्रा विहार, स्केटिंग रिंग, भैरवगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जीवाजीगंज सिविल अस्पताल सहित करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की शुरुआत की गई। ये परियोजनाएं उज्जैन को स्वच्छ, व्यवस्थित और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।
वनवासियों की आजीविका मजबूत
वन मेला प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता, अकाष्ठीय वनोपज और वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने का एक सशक्त मंच है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वन धन केंद्र, प्राथमिक लघु वनोपज समितियां, हर्बल और आयुर्वेदिक उद्योगों के प्रतिनिधि अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय कर रहे हैं। अकाष्ठीय वनोपज प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, जिससे लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। यह मेला वन संपदा के संरक्षण, संवर्धन और विपणन को नई दिशा देने का कार्य करेगा। मेले में लगभग 250 आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें विभागीय प्रदर्शनी, वन धन केंद्र, प्राथमिक लघु वनोपज समितियां, विंध्य हर्बल्स, निजी क्षेत्र और फूड झोन के स्टॉल शामिल हैं। ओपीडी में आयुर्वेदिक चिकित्सकों और पारंपरिक वैद्यों द्वारा नि:शुल्क परामर्श दिया जा रहा है। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक व्यंजनों की उपलब्धता मेले को विशेष बना रहे हैं। बच्चों के लिए किड्स झोन, वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्हील चेयर और गोल्फ कार्ट, नि:शुल्क बस सुविधा, सेल्फी प्वाइंट और बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणाएं भी की
मुख्यमंत्री ने उज्जैन के धार्मिक महत्व को बताया साथ ही सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ मंदिर शनी मंदिर, चिंतामन गणेश मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, चिंतामन गणेश मंदिर के विकास कार्य के साथ उन्नयन की भी बात कही। साथ ही आकाशवाणी केंद्र की सराहना करते हुए सीएम ने कहा कि सभी को सम्मानित करना चाहिए। बहुत अच्छा प्रसारण चल रहा है साथ ही महाकाल की गाथा भी बताई जा रही है। महिलाओं के लिए सीएम ने कहा कि निनोरा क्षेत्र और नागझरी में रेडीमेड गारमेंट की फैक्ट्री बनी है। वहां पर बहने नौकरी कर सकती है वेतन के अलावा 5000 की राशि सरकार की तरफ से भी दी जाएगी। वहीं कालिदास अकादमी में स्थाई शेड का निर्माण होगा, साइंस कॉलेज परिसर में गीता भवन बनाया जा रहा है, जल्द ही उसकी लोकार्पण भी किया जाएगा, उज्जैन से पीथमपुर के बीच सडक़ का भूमि पूजन भी जल्द होगा। महाकाल की नगरी में पहली बार हो रहा यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि शहर विकास, वन आधारित अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम बनकर सामने आया है।
