4 माह के बाद भी नहीं मिली न्यू पेंशन स्कीम की राशि, कर्मचारियों में आक्रोश

जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अधीक्षक कार्यालय के करीब 500 कर्मचारियों के खाते में न्यू पेंशन स्कीम के करीब 5 करोड़ रुपए की राशि नहीं आई है। आलम ये है कि पिछले चार महीनों से अभी तक आए-दिन मेडिकल अधीक्षक अंतर्गत कर्मचारियों का समूह मेडिकल डीन के कार्यालय के चक्कर काट रहा है सिर्फ ये जानने के लिए कि उनकी न्यू पेंशन स्कीम की राशि कहां है। करीब 500 कर्मचारियों का ये भी कहना है कि उनकी सीपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) राशि को एनपीएस (नए पेंशन योजना) खाते में समायोजित कराने में देरी क्यों हो रही है इसका जवाब भी जिम्मेदार नहीं दे पा रहे हैं। वहीं पूरे मामले में मेडिकल डीन डॉ. नवनीत सक्सेना का कहना है कि मेडिकल अधीक्षक कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की राशि समायोजित की जा चुकी है और कुछ की बची हुई है जिसे जल्द ही समायोजित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मप्र लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र तिवारी के अनुसार करीब 4 माह पहले डीन डॉ. नवनीत सक्सेना को इस मुद्दे को लेकर ज्ञापन सौंपकर मांग की गई थी कि मेडिकल अधीक्षक कार्यालय के सभी 500 कर्मचारियों के खाते में न्यू पेंशन स्कीम की संपूर्ण राशि डाली जाए। लेकिन अभी तक कर्मचारियों को न तो उनके रुपयों की जानकारी दी गई है और न ही उनके पूरे रुपयों का भुगतान किया गया है। जिससे कर्मचारियों में आक्रोश पनपता जा रहा है। जानकारी के अनुसार मेडिकल अधीक्षक कार्यालय के कर्मचारियों को आधी राशि दी गई है जबकि आधी कहां गई है आधे का भुगतान क्यों नहीं हो रहा है इसका कुछ पता नहीं चल सका है।

मेडिकल में हो रहा भेदभाव

मप्र लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र तिवारी ने नवभारत को बताया कि डीन कार्यालय की स्थापना के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मचारियों की सीपीएफ की संपूर्ण राशि (नियोक्ता/अंशदान) उनके एनपीएस खाते में समायोजित कर दी गई है जबकि अधीक्षक कार्यालय के करीब 500 कर्मचारियों की एनपीएस की राशि आधी भुगतान की गई है। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि एक ही संस्था के दो कार्यालय में इस तरह का भेदभाव संस्था हित में नहीं है।

ये है मामला…

वर्ष 2007 में संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक कार्यालय की स्थापना के अंतर्गत नियुक्त कर्मचारियों के वेतन से सीपीएफ की राशि कटौती की जाती थी। 1 अप्रैल 2018 में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एनपीएस यानि न्यू पेंशन योजना लागू होने के बाद काटी गई सीपीएफ की राशि एनपीएस खाते में जमा की गई थी लेकिन कर्मचारियों के खाते में जो सीपीएफ की राशि जमा थी उसकी लगभग आधी राशि ही कर्मचारियों के एनपीएस खाते में जमा की गई और शेष करोड़ों की राशि के बारे में कर्मचारियों को कोई जानकारी नहीं दी गई। बताया जा रहा है कि मेडिकल अस्पताल के हर एक कर्मचारी को करीब 80 हजार से 1 लाख रुपए तक की राशि उनके एनपीएस खाते में समायोजित की जानी है। ऐसे में यह राशि करीब 5 करोड़ रुपए से अधिक हैं, जिससे कर्मचारी वंचित हैं।

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