नई दिल्ली/मॉस्को | यूक्रेन के साथ जारी लंबे युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण रूस इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर श्रम संकट (Labor Shortage) से जूझ रहा है। उद्योगों को चलाने के लिए कामगारों की भारी कमी को देखते हुए रूस ने अब भारत की ओर हाथ बढ़ाया है। रूसी राजदूत डेनिस एलीपोव के अनुसार, वर्तमान में 70,000 से अधिक भारतीय रूस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक हित बढ़ रहे हैं, भारतीय कामगारों की मांग में भी अभूतपूर्व तेजी आई है। यह कदम न केवल रूस की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि भारत और रूस के मानवीय संबंधों को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में लिए गए निर्णयों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। रूस के विशेष प्रतिनिधि बोरिस टिटोव के मुताबिक, साल 2026 में कम से कम 40,000 अतिरिक्त भारतीय स्किल्ड वर्कर रूस भेजे जाने की संभावना है। मॉस्को में भारतीय राजदूत विनय कुमार ने भी पुष्टि की है कि 2026 के अंत तक रूस में भारतीय नागरिकों की कुल संख्या 80,000 के पार पहुँच सकती है। समझौते के तहत रूस ने विशेष रूप से भारतीय नागरिकों के लिए 70,000 से अधिक कार्य कोटा (Work Quota) निर्धारित किया है, जिससे निर्माण, विनिर्माण और तकनीक जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुले हैं।
रूस में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों का वेतन उनकी कुशलता के आधार पर तय किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, कम कुशल कामगारों को भी मासिक 475 यूरो से 950 यूरो (लगभग ₹45,000 से ₹90,000) तक का वेतन मिल रहा है, जो योग्यता के अनुसार और भी अधिक हो सकता है। साल 2025 के हर तिमाही में रूस जाने वाले भारतीयों की संख्या में भारी उछाल देखा गया है, जो तीसरी तिमाही तक 63,000 तक पहुँच गया था। भर्ती प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए आधिकारिक एजेंसियां सक्रिय हैं, ताकि भारतीय कामगारों को रोजगार की शर्तों और भविष्य की सुरक्षा के बारे में सटीक जानकारी मिल सके और वे किसी भी प्रकार के धोखे का शिकार न हों।

