ढाका | बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हिंसा ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। मतदान से मात्र 72 घंटे पहले रविवार देर रात बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। रिपोर्टों के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब जमात के एक कार्यक्रम में लोगों को कथित तौर पर नकद पैसे बांटे जा रहे थे। BNP समर्थकों द्वारा इसका विरोध करने पर दोनों पक्षों में जमकर लात-घूंसे और जूते-चप्पल चले। इस घटना के बाद ढाका सहित कई प्रमुख शहरों में तनाव चरम पर है और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह बांग्लादेश का पहला आम चुनाव है, जो देश की लोकतांत्रिक दिशा तय करेगा। पिछले छह हफ्तों से जारी चुनावी अभियान के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में भारत विरोधी नारेबाजी और सार्वजनिक संपत्तियों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। निर्वाचन आयोग ने हिंसा प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती शत्रुता ने मतदाताओं के मन में भय पैदा कर दिया है।
इस बार मुख्य मुकाबला तारिक रहमान की अगुवाई वाली BNP और जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन के बीच है। तारिक रहमान जहाँ “बांग्लादेश फर्स्ट” के नारे के साथ राष्ट्रवादी भावनाओं को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं जमात अपने पारंपरिक कट्टरपंथी वोट बैंक के सहारे सत्ता में वापसी की फिराक में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हिंसा पर काबू नहीं पाया गया, तो 12 फरवरी को होने वाली वोटिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अस्थिरता के इस दौर में बांग्लादेश की जनता किसे अपना नया रहनुमा चुनती है।

