लाहौर/दुबई | आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले महामुकाबले पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इस टूर्नामेंट में भारत के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया है, जिसे लेकर रविवार को आईसीसी उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा ने लाहौर में मोहसिन नकवी के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। पीसीबी ने अपना बॉयकॉट खत्म करने के लिए आईसीसी के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग वर्ल्ड कप के कुल रेवेन्यू (राजस्व) में पाकिस्तान की हिस्सेदारी बढ़ाना है। हालांकि, पीसीबी ने अभी तक आधिकारिक रूप से आईसीसी को अपने बहिष्कार की लिखित सूचना नहीं दी है।
मोहसिन नकवी द्वारा रखी गई दूसरी और सबसे पेचीदा शर्त भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज (Bilateral Series) को फिर से शुरू करना है। पाकिस्तान चाहता है कि आईसीसी भारत पर दबाव बनाए ताकि दोनों देशों के बीच 2012 से बंद पड़ी घरेलू सीरीज दोबारा शुरू हो सके। इसके अलावा, तीसरी मांग यह है कि मैच के दौरान और बाद में दोनों देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे से हाथ मिलाएं और सामान्य खेल भावना का प्रदर्शन करें। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की रेवेन्यू बढ़ाने की मांग पर विचार हो सकता है, लेकिन भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज की शर्त को बीसीसीआई सिरे से खारिज कर सकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंधों में कड़वाहट पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद और बढ़ गई है। इस घटना के बाद से भारत का रुख पाकिस्तान के प्रति बेहद सख्त है और टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाना तक बंद कर दिया है। सुरक्षा और राजनीतिक तनाव के बीच बीसीसीआई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद रुकने तक द्विपक्षीय सीरीज का सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐसे में 15 फरवरी को होने वाले भारत-पाक मुकाबले का भविष्य अब आईसीसी और बीसीसीआई के अगले कड़े फैसलों पर टिका हुआ है।

