कोयंबटूर | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण के तहत कोयंबटूर में छात्रों के साथ आत्मीय संवाद किया। इस बार कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पीएम मोदी ने दिल्ली के बजाय देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर छात्रों से मिलने के सुझाव को अमल में लाया। तमिलनाडु के छात्रों की जिज्ञासा और ऊर्जा से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों से संवाद कर रहे हैं और हर बार उन्हें युवाओं से कुछ नया सीखने को मिलता है। उन्होंने स्टार्टअप के प्रति छात्रों के बढ़ते रुझान की सराहना करते हुए इसे आधुनिक भारत की नई पहचान बताया।
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपनी रुचि को पहचानें और समान विचारधारा वाले दोस्तों के साथ मिलकर छोटे स्तर से स्टार्टअप की शुरुआत करें। अनुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि प्रेरणा (Inspiration) तभी काम आती है जब जीवन में अनुशासन हो; बिना अनुशासन के प्रेरणा सिर्फ बोझ बन जाती है और अंततः निराशा पैदा करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में सफलता पाने के लिए स्व-अनुशासन ‘सोने पर सुहागा’ की तरह काम करता है, जो छात्रों को उनके लक्ष्य तक पहुँचाने में मदद करता है।
पढ़ाई और पैशन के बीच संतुलन बनाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने एक अनूठा नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और पैशन को अलग-अलग देखने के बजाय उन्हें एक-दूसरे का पूरक बनाना चाहिए। साथ ही, ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केवल बातों से देश विकसित नहीं होगा, बल्कि हमें विकसित देशों जैसी नागरिक आदतें, जैसे स्वच्छता बनाए रखना और नियमों का पालन करना, अपनानी होंगी। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि हर छात्र का छोटा सा सकारात्मक कदम देश के स्वर्णिम भविष्य के निर्माण में एक बड़ा योगदान साबित होगा।

