
महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
जब खुद की ही सरकार में पार्टी के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री व विधायक की बातों को तवज्जो नहीं दी गई तो फिर आम आदमी की बिसात ही क्या.. यह बात एक बार फिर इसलिए चर्चाओं के केंद्र में है, क्योंकि अनुशासन के लिए जाने वाली भाजपा में उसके ही वरिष्ठ विधायक की मांग को हाशिये पर रखा गया । हुआ यूं कि कुछ दिन पहले ही
जबलपुर के बरगी बांध परिक्षेत्र से रीवा तक जाने वाली दांई तट नहर सगड़ा झपनी गांव के पास फूटी और इसके बाद आसपास के 6 गांवों की फसलें जलमग्र हुईं जिससे 20 किसान प्रभावित हुए। नहर फूटने की वजह जो सामने आई उसने जिम्मेदारों के रवैये की ऐसी पोल खोली कि कलेक्टर को भी कार्रवाई करने अब सोचना पड़ रहा है। नहर फूटने की खबर मिलते ही पूर्व मंत्री व विधायक अजय विश्नोई ने सोशल मीडिया में जो दर्द लिखा उससे साफ था कि बरगी बांध की दांई तट की नहर के मरम्मत कार्य और जिले की अन्य नहरों के मरम्मत कार्य की वह कई बार शिकायत कर चुके थे लेकिन समय रहते जिम्मेदारों ने कोई एक्शन नहीं लिया और बाद में नहर फूटी जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। मामले में स्थानीय किसानों ने स्पष्ट कहा कि सगड़ा झपनी गांव के पास दांई तट नहर में पिछले 2 साल से पानी धीरे धीरे करके रिस रहा था जिसकी मरम्मत कराने की कई बार बात कही गई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हालिया हुए इस घटनाक्रम के बाद किसान ये भी कहते नजर आए कि जिम्मेदार खुद चाह रहे थे कि नहर फूटे और किसानों का नुकसान हो। उधर श्रृद्धा बंसोडकर कार्यपालन यंत्री, दांई तट नहर द्वारा पत्रकारों को दिए गए बयान ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं। बयान में श्रृद्धा बंसोडकर ने खुद माना कि नहर में पानी का सीपेज कई सालों से था जिसका मरम्मत कार्य भी काफी समय से नहीं हुआ। इस बयान के बाद कलेक्टर ने भी अब सभी जिम्मेदारों को आड़े हाथों लेने का मन बना लिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि गाज किस किस पर गिरती है ?
ब्लैक लिस्टेड हो गए सम्मानित…?
सेठ गोविंददास जिला चिकित्सालय (विक्टोरिया) एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। इस बार जो वजह सामने आई है वो काफी चौंकाने वाली रही है। चर्चा है कि जिसे ब्लैक लिस्ट में डालना था उन्हें ही खुश करने प्रशस्ति पत्र बांट दिए गए। सबसे ज्यादा किरकिरी तो तब हुई जब विक्टोरिया के साइकिल स्टैण्ड का ठेका लेने वाले से लेकर सिक्योरिटी ठेका कंपनी के कर्मचारियों तक को रेवड़ी के जैसे प्रशस्ति पत्र बांटे गए। मौका था गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयेाजित कार्यक्रम का। ऐसे लोगों को प्रशस्ति पत्र मिलता देख वाकई में ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों में खासा आक्रोश भी नजर आया और वह ये कहते हुए नजर आए कि जी हुजूरी करने वालों की ही आज के समय कीमत है, काम करने वालों की नहीं। वहीं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित होने वाले नामों की सूची बनाने वालों की योग्यता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, वह इसलिए क्योंकि सवालों के घेरे में रहे नामों को लेकर कई महीनों से विक्टोरिया में बात चल रही थी कि किसको ब्लैक लिस्ट करना है और किसको नहीं। हैरानी की बात तो ये थी कि इस सम्मान वाली सूची में उन लोगों के नाम गायब थे जो लंबे समय से न केवल विक्टोरिया अस्पताल में रीढ़ की हड्डी की तरह जुटे हुए हैं, बल्कि कोरोना काल में अपनी चिंता किये बिना योद्धा की तरह डटे रहे। फिलहाल अस्पताल में आलम ये है कि इस गंभीर मसले पर व्यवस्थाएं सुधारने की बजाय आपसी खींचतान जमकर मची हुई है और उसका नुकसान मरीजों का हो रहा है।
लापरवाही की सारी हदें पार….
जबलपुर कैंट विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रांझी सर्रा पीपर, नगर निगम जोन क्रमांक 10 में संवेदनहीनता का ऐसा मामला सामने आया जिसने लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। मामला रांझी सर्रा पीपर निवासी विजय श्रीवास्तव की मां की तेरहवीं कार्यक्रम से जुड़ा है जहां परिजनों ने तेरहवीं कार्यक्रम के लिए सामुदायिक भवन बुक कराया और बकायदा निर्धारित शुल्क नगर निगम में जमा करा दिया, लेकिन तेरहवीं कार्यक्रम वाले दिन परिजन सामुदायिक भवन की चाबी के लिए नगर निगम कार्यालय, क्षेत्रीय पार्षद और सुपरवाइजर के चक्कर काटते रहे मगर उन्हें चाबी नहीं मिली। अंतत: परेशान, हताश परिजनों ने बीच सड़क पर टेंट लगाकर जैसे तैसे तेरहवीं कार्यक्रम पूरा कराया। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही के चलते विजय श्रीवास्तव व उनके परिवार को दु:ख के समय और अधिक मानसिक पीड़ा दी। हैरानी होती है ये सिस्टम जानकर, देखकर और सुनकर कि शुल्क जमा करने के बाद भी लोगों को सामुदायिक भवन की सुविधा न मिल पाए। खबर है कि मामला निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है और अब निगमायुक्त किस किस पर सख्त एक्शन लेते हैं ये आने वाले दिनों में पता चल पाएगा।
