लंदन, 06 फरवरी (वार्ता) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत के रूप में श्री पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ श्री मैंडेलसन के कथित संबंधों को लेकर विवाद गहराने के बाद श्री स्टारमर ने यह कदम उठाया। श्री स्टारमर ने फरवरी 2025 में श्री मैंडेलसन को अमेरिका में राजदूत नियुक्त किया था। बाद में एपस्टीन से उनके संबंधों को लेकर उठे विवाद के बीच सितंबर में उन्हें पद से हटा दिया गया। रविवार को श्री मैंडेलसन ने लेबर पार्टी से अपने इस्तीफे की भी घोषणा की। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्री स्टारमर ने कहा, “एपस्टीन के पीड़ितों ने न्याय में देरी और जवाबदेही से वंचित होने का अनुभव किया है। मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं क्षमा चाहता हूं। आपके साथ जो हुआ उसके लिए, सत्ता में बैठे लोगों की विफलता के लिए, मैंडेलसन की बातों पर विश्वास करने और उन्हें नियुक्त करने के लिए, तथा इस पूरे प्रकरण को फिर से सार्वजनिक रूप से सामने आते देखने की आपकी मजबूरी के लिए।”
विवाद के बीच विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग भी की है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में जारी दस्तावेजों और निजी तस्वीरों में श्री मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच घनिष्ठ पत्राचार का उल्लेख सामने आया है, जिससे विवाद और गहरा गया। इन खुलासों के बाद श्री मैंडेलसन ने पहले हाउस ऑफ लॉर्ड्स से इस्तीफा दिया था। प्रकरण को लेकर सार्वजनिक पद पर कथित दुराचार के संबंध में पुलिस जांच भी शुरू होने की खबर है। 30 जनवरी को अमेरिकी उप अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने एपस्टीन मामले से संबंधित दस्तावेजों के प्रकाशन की प्रक्रिया पूर्ण होने की घोषणा की। नवीनतम खुलासों के बाद जारी सामग्री की कुल संख्या 35 लाख से अधिक फाइलों तक पहुंच गई है। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 2003-2004 के दौरान श्री मैंडेलसन को एपस्टीन से 75,000 डॉलर प्राप्त हुए थे।
सितंबर 2025 में ‘द सन’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वर्ष 2008 में, जब एपस्टीन पर एक नाबालिग लड़की को देह व्यापार में धकेलने का मामला चल रहा था, तब श्री मैंडेलसन ने उन्हें पत्र लिखकर समर्थन जताया था। रिपोर्ट के अनुसार, सजा सुनाए जाने से पहले उन्होंने एपस्टीन को “शीघ्र रिहाई के लिए संघर्ष” करने की सलाह दी थी और मुकदमे को “दार्शनिक दृष्टिकोण” से लेने की बात कही थी।

