
शुजालपुर। सिटी मंडी रोड स्थित बिजली कंपनी के 132 केवी उपकेंद्र से सामान बिक्री और इसमें दो कबाड़ी, वाहन चालक और मजदूर समेत 6 लोगों पर केस दर्ज होने के मामले में विभागीय जांच समिति ने उपकेंद्र प्रभारी एई विजय ओझा की गंभीर लापरवाही मानी है. रिपोर्ट जबलपुर मुख्यालय भेजे जाने के बाद वहां से एई ओझा को तत्काल निलंबित कर सिंगरौली अटैच किया गया है. उन्हें वहां टेस्टिंग डिवीजन में अटैच किया गया है.
पीआरओ मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी कैंप जबलपुर शशिकांत ओझा ने बताया कि मामले की जांच उज्जैन से एसी योगेशकुमार माथुर और उज्जैन के ही ईई बीके चौधरी ने की थी. दोनों ने प्रथम दृष्टया मामले में एई ओझा की लापरवाही गंभीर मानी है. इसी के आधार पर उन पर यह कार्रवाई की गई है. साथ ही ओझा के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा रही है, जो जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट देगी. उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. कमेटी की घोषण चीफ इंजीनियर जबलपुर अमरकीर्ति सक्सेना जल्द ही करेंगे.
यह है मामला…
सिटी थाना शुजालपुर में 31 जनवरी को कार्यपालन अभियंता अरुणकुमार कनोजिया की सूचना पर कैलाश बागरी, जावेद खान, शकील खान, आरिफ खान, इस्माइल खान एवं आमिर के विरुद्ध चोरी का प्रकरण दर्ज किया गया. केस में उल्लेख किया गया कि 132 केवी उपकेंद्र से सामग्री 220 केवी उपकेंद्र भेजी जानी थी, लेकिन वाहन चालक और अन्य लोग उसे वहां न ले जाकर कबाड़ी के घर ले गए. इधर मामले में पीडि़तों का कहना है कि सामग्री विभागीय अधिकारी ने बेची थी.
पुलिस ने एफआइआर में भी कर दी थी गड़बड़ी!
इधर पुलिस एफआइआर में दशमलव लगाकर भी खेल किया गया है. इसमें कई क्विंटल जब्त सामान को किलो बताया गया है. मामले में अरुण कंजोलिया कार्यपालन अभियंता शुजालपुर ने पुलिस में शिकायत की. पुलिस ने दर्ज एफ आइआर में दशमलव लगाकर सामान की मात्रा बदल दी. 497 किलो सामान को केवल 4 किलो 900 ग्राम और 297 किलो को केवल 2 किलो 900 ग्राम दर्ज किया है.
यह सामान बेचा गया था
कबाड़ी के आरोपों के अनुसार उपकेंद्र पर पदस्थ एई विजय ओझा ने परिसर में रखी लाखों की सामग्री कबाड़ के रूप में बेचने की बातचीत की थी. 29 जनवरी शाम उपकेंद्र परिसर जाकर तांबे की रॉड, क्वाइल रिले, एल्यूमीनियम, लोहा, बैटरी सहित अन्य उपकरण देखे. 30 जनवरी को सामग्री की कीमत तौल उपरांत 1 लाख 22 हजार 360 रुपए बनी थी, जिसकी राशि ओझा को राउंड फि गर में 1 लाख 22 हजार 500 रुपए अकोदिया रोड स्थित एक कैफे दिए गए. तौल कार्य करने के बाद 132 केवी से ली गई सामग्री अपने गोदाम पर भेज दी. जहां पर कबाड़ा उतारा जा रहा था तभी पुलिस पहुंची और इसे चोरी का माल बता दिया, जबकि विभागीय रजिस्टर में वाहन, व्यक्तियों की आवक जावक दर्ज की गई, जिसमें सामग्री एई के आदेश से ले जाने का उल्लेख है. 30 जनवरी को कंपनी अधिकारियों को सूचना नहीं दी गई. 31 जनवरी को मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस ने चोरी का केस दर्ज किया था.
इनका कहना है
पूरे मामले में कार्यपालन यंत्री अरुण कंजोलिया की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने बिना प्रारंभिक जांच के मामले में एफआइआर दर्ज करवा दी.दो सदस्यीय जांच कमेटी ने रिपोर्ट दी थी जिसमें एई विजय ओझा की गंभीर लापरवाही मानी गई है. इस लापरवाही पर ओझा को निलंबित कर सिंगरौली स्थित टेस्टिंग डिवीजन में अटैच किया है. साथ ही विभागीय जांच भी शुरू की जारी है. रिपोर्ट आने के बाद आने की कार्रवाई की जाएगी.
शशिकांत ओझा, पीआरओ, मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी कैंप, जबलपुर
