नयी दिल्ली, 05 फरवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया, जिससे उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मामलों में भाग लेने और पद संभालने की अनुमति मिल गई है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने श्री ठाकुर की ओर से दायर एक याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया। उन्होंने ने 2017 में अदालत द्वारा जारी एक निर्देश को वापस लेने की मांग की थी।
गौरतलब है कि जनवरी 2017 में, उच्चतम न्यायालय ने तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को लोढ़ा समिति के सुधारों को लागू करने से संबंधित निर्देशों का पालन न करने के कारण पद से हटा दिया था। उस आदेश के निर्देश (ii) में विशेष रूप से दोनों पदाधिकारियों को बीसीसीआई का कोई भी कार्य करने से रोक दिया गया था।
श्री ठाकुर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने दलील दी कि यह प्रतिबंध लगभग नौ वर्षों से जारी है और इसका उद्देश्य कभी भी स्थायी अयोग्यता थोपना नहीं था। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि श्री ठाकुर पहले ही अपने पिछले आचरण के लिए बिना शर्त माफी मांग चुके हैं।
पीठ ने दलील से सहमत होते हुए कहा कि 2017 के निर्देश को आजीवन प्रतिबंध के रूप में नहीं माना जा सकता है। आनुपातिकता के सिद्धांत को लागू करते हुए, न्यायालय ने उक्त प्रतिबंध को वापस ले लिया। इसके परिणामस्वरूप, पीठ ने स्पष्ट किया कि अनुराग ठाकुर अब बीसीसीआई के संविधान और लागू नियमों के अनुसार इसकी गतिविधियों में भाग लेने के हकदार हैं।
लोढ़ा समिति के सचिव का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने हालांकि इस याचिका का विरोध किया।
