आदिलाबाद | तेलंगाना के आदिलाबाद में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ‘मियां’ समुदाय पर दिए गए बयानों की कड़ी निंदा की। ओवैसी ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर सवाल उठाए जिसमें कथित तौर पर मियां समुदाय के ऑटो चालकों को कम पैसे देने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना छोटी मानसिकता को दर्शाता है। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि मियां समुदाय के लोग भारत के सम्मानित नागरिक हैं और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने की धमकी देना देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों और ‘विकसित भारत’ के विजन पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने इसे विरोधाभासों का पुलिंदा बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार एक तरफ चांद पर घर बनाने और भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ एक गरीब रेहड़ी-पटरी वाले या ऑटो चलाने वाले को उसका हक देने में भी नफरत दिखाई जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक रुपया बचाकर या किसी गरीब का हक मारकर भारत विश्व गुरु बन पाएगा? उनके अनुसार, भाजपा की विकास की बातें और नफरत की राजनीति साथ-साथ नहीं चल सकतीं।
ओवैसी ने उत्तराखंड के कोटद्वार की एक हालिया घटना का जिक्र करते हुए भाजपा शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि वहां एक हिंदू युवक, दीपक कुमार ने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार की मदद करने की कोशिश की, जिसे बजरंग दल के लोग प्रताड़ित कर रहे थे। ओवैसी ने आरोप लगाया कि मदद करने के बदले पुलिस ने दीपक कुमार पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया। उन्होंने पूछा कि क्या अब भाजपा सरकार में किसी गरीब या सताए हुए व्यक्ति की सहायता करना भी गुनाह की श्रेणी में आता है? उन्होंने जनता से नफरत की इस राजनीति को पहचान कर विकास के असली मुद्दों पर जवाब मांगने की अपील की।

