घंटों मशक्कत के बाद गंभीर एनीमिक मरीज को मिल पाया 1 युनिट रक्त

सतना।थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त देने के मामले को लेकर सवालों के घेरे में आने के बाद जिला चिकित्सालय के रक्त कोष के प्रभारी से लेकर टेक्रीशियन तक के निलंबन की कार्रवाई कर दी गई थी. लेकिन इसके बावजूद भी रक्त कोष में पदस्थ मौजूदा अमले की कार्यशैली में कोई सुधार होता नजर नहीं आ रहा है. रक्त कोष की संवेदनहीन कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गंभीर एनीमिया से पीडि़त महिला को 1 युनिट रक्त उपलब्ध कराने में 8 घंटे से अधिक का समय लग गया.

मैहर जिले के चकेरी चोरहटा निवासी वीरेंद्र कुमार केवट की 25 वर्षीय पत्नी रन्नो केवट पिछले 3 दिनों से मैहर के सिविल अस्पताल में उपचाररत है. उपचार करने वाले चिकित्सक डॉ. आर एन पाण्डेय के अनुसार महिला मरीज सीवियर एनीमिक है. लिहाजा उसे कम से कम 3 युनिट रक्त चढ़ाए जाने की आवश्यकता महसूस हुई. चूंकि मैहर सिविल अस्पताल में ए पॉजिटिव रक्त उपलब्ध नहीं था. लिहाजा महिला के पति वीरेंद्र को जिला चिकित्सालय में स्थित रक्त कोष से रक्त प्राप्त करने के लिए भेजा गया. इस संबंध में सिविल अस्पताल मैहर से जिला चिकित्सालय सतना स्थित रक्त कोष में फोन के माध्यम से पूर्व सूचना भी दे दी गई. जिसके चलते बुधवार की सुबह 10 बजे वीरेंद्र सतना स्थित रक्त कोष में पहुंच गया और कागज दिखाते हुए रक्त की मांग की. वहां पर तैनात कर्मचारियों ने कागज देखते ही एक्सचेंज के लिए डोनर की मांग सामने रख दी. लिहाजा वीरेंद्र के साथ आए व्यक्ति ने फौरन ही एक्सचेंज के अंतर्गत अपना रक्त दे दिया. लेकिन इसके बाद जब वीरेंद्र को रक्त देने की बारी आई तो वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे घुमाना शुरु कर दिया. हर बार आधे घंटे की ेमोहलत मांगते हुए कई घंटे गुजार दिए गए. चंकि वीरेंद्र की पत्नी को तत्काल रक्त चढ़ाए जाने की आवश्यकता थी. लिहाजा समय बीतने पर वह परेशान होने लगा. वीरेंद्र ने बार बार अपनी पत्नी की गंभीर बीमारी का हवाला देने का प्रयास किया. लेकिन कर्मचारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी. इस दौरान रक्त कोष से कई अन्य लोगों को रक्त दिया जाता देख वीरेंद्र ने प्रश्र भी किया. लेकिन कर्मचारियोंं ने यह कहते हुए उसे चुप करा दिया कि जिस ग्रुप का रक्त उसे चाहिए वह फिलहाल उपलब्ध नहीं है. इतना ही नहीं बल्कि कई बार रक्त की मांग करता देख कर्मचारियों ने उससे साफ कर दिया कि अब रक्त नहीं मिलेगा. हलांकि मीडिया के दखल के बाद कर्मचारी बैकफुट में आ गए और रक्त देने को राजी हो गए. लेकिन इसके बावजूद भी आधे-आधे घंटे तक टरकाते हुए पूरा दिन बिता दिया गया. श््रााम के लगभग 6 बजे के बाद किसी तरह वीरेंद्र को 1 युनिट रक्त मिला. जिसे लेकर वह फौरन मैहर के लिए रवाना हो गया. जहां पर उसकी पत्नी को रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया शुरु हो सकी.

भटकाने की पुरानी कार्यशैली

गंभीर एनीमिक मरीज को पहले होल ब्लड चढ़ाया जाता था. लेकिन बदली हुई व्यवस्था के अंतर्गत प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे कंपोनेंट्स को अलग कर दिया जाता है. लिहाजा अब गंभीर एनीमिक मरीज को गाढ़ा पीआरबीसी चढ़ाया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में अधिकतम 3 घंटे का समय लग सकता है. लेकिन इसके लिए रक्त कोष के कर्मचारियों द्वारा मरीज के परिजनों को 1 से 2 दिन तक भटकाया जाता है. इतना ही नहीं बल्कि कई बार तो परिजनों को घंटों इतजार कराने के बाद यह कहकर बैरंग लौटा दिया जाता है कि एक्सचेंज में मिले ब्लड में गड़बड़ी पाई गई है. रक्त के लिए मरीज के परिजनों को बेवजह भटकाने के पीछे की वजह भी वही बताई जाती है जिसके लिए यहां की कार्यशैली वर्षों से कुख्यात रही है. लिहाजा यदि रक्त मिलने में हुई देरी के चलते किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो उसका जिम्मेदार किसे माना जाए.

Next Post

पुष्पराज कालोनी के मुख्य मार्ग पर धंसा वाहन

Thu Feb 5 , 2026
सतना। शहर में सीवर लाइन बनाए जाने को लेकर एक ओर जहां कार्य करने वाली ठेका कंपनी की बेपरवाह कार्यशैली पर कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसका खामियाजा भुगतत-भुगतते आम जन त्राहि-त्राहि करने लगा है. ताजा मामला पुप्पराज कालोनी के मुख्य मार्ग का सामने […]

You May Like