
इंदौर. शहर के सुपर कॉरिडोर से लगी आईसीजी गोलकुंडा कॉलोनी के खिलाफ टीएनसीपी ने नोटिस जारी किया है. नोटिस में जवाब नहीं देने पर कॉलोनी की अनुमति निरस्त करने की कार्रवाई का भी उल्लेख है. उक्त कॉलोनी 26 एकड़ से ज्यादा जमीन पर काटी गई है. कॉलोनी के खिलाफ अधिवक्ता ने शिकायत की है. खास बात यह है कि उक्त कॉलोनी औद्योगिक उपयोग की जमीन पर आवासीय विकसित की गई है.
शहर में सुपर कॉरिडोर के पास और मल्हारगंज तहसील के गांव टिगरिया बादशाह में आईसीजी गोलकुंडा आवासीय कॉलोनी विकसित की गई है. इसके संचालक महेंद्र और सचिन पुरुषोत्तम पाटीदार है. उक्त जमीन का मास्टर प्लान में लैंड यूज औद्योगिक है, मगर टीएनसीपी से आवासीय कॉलोनी की अनुमति जारी की गई. टीएनसीपी ने कंप्यूटर से उक्त कॉलोनी और खसरे पर जारी अनुमति की डिटेल्स हटा दी है. ऑनलाइन कंप्यूटर अब उक्त अनुमति को नहीं दिखा रहा है. इससे समझा जा सकता है कि किस तरह से नियमों को ताक में रख कर किस हद तक काम किया जाता है. शहर में उक्त कॉलोनी में अपनी जीवन भर की कमाई खर्च प्लॉट लेने वालों के साथ टीएनसीपी और जमीन मालिकों ने सीधा धोखा कर दिया है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें नगर निगम ने भी विकास अनुमति जारी की है. निगम ने टीएनसीपी की अनुमति को आधार बनाया है. उक्त मामले में अधिवक्ता विनोद कुमार वर्मा ने टीएनसीए में शिकायत की है. अधिवक्ता वर्मा की शिकायत पर टीएनसीए ने नोटिस क्रमांक 3866 के द्वारा 8 दिसंबर 25 को नोटिस जारी किया है. नोटिस में आईसीजी गोलकुंडा कॉलोनी के संचालक महेंद्र और सचिन पाटीदार के नाम से जारी नोटिस में उल्लेख किया है कि छलपूर्वक झूठी जानकारी देकर अनुमति ली है. यदि नोटिस का जवाब नहीं दिया तो अनुमति निरस्त करने की कारवाई कर दी जाएगी.
आंख मीचकर नहीं दी अनुमति
शहर में तीन सौ प्लॉट की कॉलोनी को आंख मीचकर अनुमति नहीं दी गई है. मौका मुआयना फिर कैसे किया जाता है, स्थल निरीक्षण कैसे होता है. गोलकुंडा कॉलोनी इसका जीवंत सच्चा उदाहरण है. ऐसे कई सवालात है जो शहर में सीधे साधे लोगों को ठगने में अधिकारियों और जमीन मालिकों के गठजोड़ को साबित करते है. कार्रवाई भी तब की जाती है, जब कोई शिकायत करता है. हालांकि अभी नोटिस जारी किया है. टीएनसीपी के सूत्रों ने बताया कि जवाब नहीं दिया तो दूसरा नोटिस दिया जाएगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
ऐसे मामलों से सरकारी विभाग पर उठते हैं सवाल
उक्त मामले में सवाल यह है कि मास्टर प्लान तैयार करने और उसमें आरक्षित जमीनों पर सही उपयोग की जिम्मेदारी किसकी है? टीएनसीपी के अधिकारियों द्वारा उक्त कॉलोनी की अनुमति देते समय लैंड यूज नहीं देखा क्या?
