
भिंड। विधायक केशव देसाई ने आरोप लगाया है कि मालनपुर में संचालित कई औद्योगिक इकाइयाँ खुलेआम पर्यावरण कानूनों को कुचलते हुए क्षेत्र की नदियों, नालों और खुले इलाकों में रासायनिक व चिकित्सीय अपशिष्ट फेंक रही हैं। इसका दुष्परिणाम अब भयावह रूप ले चुका है। हजारों स्थानीय लोगों की परेशानी का कारण बनी ईन कम्पनियों ओर सिस्टम में बैठे आला अफसर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं. हाल ही में इंदौर में दूषित पानी से दो दर्जन से अधिक परिवारों में मातम छा गया, शायद मालनपुर में ऐसे ही किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुलेगी और फिर वहीं ड्रामा, मुआवजा, राहत, कमीशन, फलाना ढिमका आदि के साथ लाशों के ढेर पर सफेदपोश राजनीतिक रोटियां सेकते नजर आएंगे ?
उन्होंने कहा कि कारखाने से निकलने वाला बिना शोधन का रसायनयुक्त दूषित जल नालियों के सहारे सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। इस ज़हरीले पानी ने नदियों को जीवनदायिनी से मौत की धार में बदल दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार नदी में मछलियाँ और अन्य जलीय जीव मर रहे हैं व्यक्तियों में खाज खुजली जैसी बीमारियां फ़ैल रहीं हैं,पानी से दुर्गंध उठ रही है,और नदी किनारे की उपजाऊ जमीन तेजी से बंजर होती जा रही है।
यह प्रदूषण नहीं, बल्कि प्रकृति के विरुद्ध खुला अपराध है।
*अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र केवल काग़ज़ों में*
उन्होंने कहा कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र अनिवार्य रूप से स्थापित होना चाहिए। लेकिन मालनपुर की कई फैक्ट्रियों में यह संयंत्र मौजूद ही नहीं है, या फिर केवल काग़ज़ों में दिखाया गया है। बिना शोधन का रसायनयुक्त जल सीधे बाहर निकाला जा रहा है। इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिना शोधन संयंत्र के इन फैक्ट्रियों को संचालन की अनुमति किसके संरक्षण में मिली ?
