
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मंगलवार को स्कूल शिक्षा विभाग में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के माध्यम से बड़े पैमाने पर संगठित और कार्टेल आधारित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी खरीदी में योजनाबद्ध अनियमितताओं के लिए डीपीआई एक केंद्र बन चुका है।
संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए एमपीसीसी सचिव राजकुमार सिंह तथा प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता संतोष सिंह परिहार और जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार में भ्रष्टाचार अब किसी एक मामले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यवस्थित मॉडल का रूप ले चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों में टेंडर और खरीदी नीतियां इस तरह बनाई जा रही हैं, जिससे खुली प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाए और चुनिंदा कंपनियों को लाभ मिले।
कांग्रेस नेताओं ने दस्तावेजी साक्ष्यों का हवाला देते हुए डीपीआई द्वारा जारी इंटरएक्टिव पैनल सप्लाई टेंडर पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पात्रता की शर्तें जानबूझकर इस तरह तय की गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई और पहले से तय कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके। दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि कम दरों वाली निविदाओं को नजरअंदाज किया गया और चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पात्रता निर्धारण में भेदभाव किया गया, जहां एलजी और सैमसंग को योग्य ठहराया गया, जबकि एसर को मनमाने आधार पर अयोग्य घोषित किया गया। असम सरकार की खरीद से तुलना करते हुए कांग्रेस ने कहा कि वहां समान उपकरण कम कीमत पर खरीदे गए। पार्टी ने जीईएम पोर्टल और जिला स्तर की खरीद के आंकड़े भी पेश किए।
कांग्रेस ने “कार्टेल मॉडल” के जरिए टेंडर बांटे जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ₹800 से ₹1,000 करोड़ के कार्यों की पहले ही बुकिंग की जा चुकी है। पार्टी ने उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, एल-1 आधारित खुली प्रतिस्पर्धा से टेंडरों की पुनः समीक्षा और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
