
सीधी। सीधी की अग्रणी नाट्य संस्था इन्द्रवती नाट्य समिति एवं ट्रांसफ्रेम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सातवें विंध्य इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के समापन उपरांत 1 फरवरी 2026 को इन्द्रवती लोक कला ग्राम बकवा में बघेली लोक कला समागम का भव्य आयोजन किया गया।
समागम का शुभारंभ लोक देवता घासी घमसान एवं बड़ादेव के विधिवत पूजन के साथ किया गया। सर्वप्रथम ग्राम में पधारे सभी देशी-विदेशी मेहमानों, कलाकारों, फिल्म समीक्षकों एवं शोधार्थियों का चंदन टीका, आरती एवं माल्यार्पण के साथ पारंपरिक देशी अंदाज में स्वागत किया गया। इस आत्मीय स्वागत पर अतिथि भावविभोर नजर आए। इसके उपरांत गुदुम बाजा, अहिराई लाठी नृत्य एवं करमा नृत्य के साथ ग्राम की सडक़ों पर भव्य झांकी निकाली गई, जो मेहमानों के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। झांकी जब आयोजन स्थल मउहरी होम स्टे परिसर पहुंची तो वहां सइला नृत्य के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम स्थल पर घासी घमसान एवं बड़ादेव कुल देवता का पूजन कर लोक कला समागम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात सइला लोकनृत्य के कलाकार स्व.रावेन्द्र सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। मेहमानों के स्वागत में पारंपरिक व्यंजनों के अंतर्गत महुआ, तिल, झलरी, भुट्टा एवं लाई के लड्डू परोसे गए, जिन्हें अतिथियों ने बड़े चाव से ग्रहण किया। इस अवसर पर लोक कला संरक्षक एवं वरिष्ठ रंगकर्मी रोशनी प्रसाद मिश्र ने आयोजन एवं प्रस्तुत की जाने वाली लोक कलाओं के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद लोकनृत्य प्रस्तुतियों का क्रम प्रारंभ हुआ, जिसमें क्रमश: अहिराई लाठी नृत्य, गोंडी सइला नृत्य, चमरौहीं लोकनृत्य, घसिया करमा लोकनृत्य एवं गुदुम बाजा नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी गईं। समवेत प्रस्तुति के दौरान देश-विदेश से आए अतिथि, कलाकार एवं कला प्रेमी स्वयं को रोक नहीं पाए और सभी ने मांदल की थाप पर जमकर नृत्य किया। प्रस्तुतियों के उपरांत सभी अतिथि रामदेव सिंह के निवास पहुंचे, जहां पारंपरिक ढंग से जमीन पर पंगत में बैठाकर भोजन कराया गया। भोजन में कोदई का भात, धान चावल का भात, मूंग-उड़द दाल की दरभजिया, कढ़ी, भरता, सेमी व भथुरी की साग, चोखा, कैथा की चटनी, भुट्टा व बेर्री की रोटी, आंवला का रक्का, आम का सेंधान, पापड़, सलाद एवं मेझरी की खीर परोसी गई। भोजन की विविधता और स्वाद से अतिथि अचंभित रह गए। उनका कहना था कि दुनिया भर में अनेक आयोजनों में जाने के बावजूद ऐसा आयोजन और भोजन पहली बार अनुभव किया है। भोजन उपरांत बघेली पुाग गायन की प्रस्तुति ने समागम को और भी लोक रंगों से सराबोर कर दिया।
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इन कलाकारों की रही विशेष उपस्थिति
इस लोक कला समागम में स्टेफनो रोसेट्टी इटली, सुप्रसिद्ध अभिनेत्री कामना पाठक, अभिनेता संदीप श्रीधर, सतीश सिंह बादल, इंद्रमोहन सिंह, बी.सुरेश कुमार केरल, सम्पथ कुमार, प्रभा केए, पुष्पेन्द्र अल्बे, आशीष बैथरी, संजय तिवारी, राजेश धवले, सोनू, रणदीप चौधरी, देवयानी अनंत, उत्सव ठाकुर, रोहित पाटीदार, तन्मय जोशी, शोभा अक्षर, दीप्ती, आस्था, बिन्दु, पुष्पलता सांगड़े, आरती यादव, धीरज, दिव्या रॉय, शंपा मजुमदार, शालिनी, प्रमोद द्विवेदी, कृष, अवनीश, सूर्यकांत, अयान रजा, पुलेंथिरारस श्रीलंका, शिवरसा सरन्या श्रीलंका सहित अनेक फिल्म मेकर, डायरेक्टर, अभिनेता, लेखक एवं फिल्म क्रिटिक्स उपस्थित रहे।
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आयोजन समिति एवं स्थानीय सहयोग
आयोजन समिति से अध्यक्ष रामनरेश सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष बाबूलाल कुंदेर, फेस्टिवल डायरेक्टर प्रवीण सिंह चौहान, प्रबंधक नीरज कुंदेर, संयोजक रोशनी प्रसाद मिश्र, प्रबंधन सहयोगी रजनीश जायसवाल, प्रजीत साकेत, कला दीर्घा प्रबंधक शिव नारायण कुंदेर, वाहन प्रबंधक राकेश जायसवाल, आवास प्रबंधक गौरव अवधिया सहित सुनील भुर्तिया, सुनील चौधरी, अनूप कुंदेर, कुंदन वर्मा एवं अन्य सहयोगी शामिल रहे। स्थानीय प्रबंधन का दायित्व रामपाल सिंह, संसार सिंह, रामनरेश सिंह, कुशल सिंह, चंद्रभान सिंह, लल्लू सिंहए कृष्णप्रताप सिंहए रामदेव सिंह एवं नन्हे घासी द्वारा निभाया गया।
