
रीवा, यूजीसी काले कानून के खिलाफ भारत बंद का असर रीवा में दिखा. सुबह से लेकर शाम तक दुकानो के शटर गिरे रहे. सवर्ण समाज एवं बुद्धजीवी समुदाय के लोगो ने बाजार बंद कराया. युवाओ की टोली शहर भर में घूमती रही. व्यापारियों ने समर्थन करते हुए अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखे.
रीवा शहर पूर्णत: बंद रहा और यूजीसी काले कानून का जमकर विरोध देखने को मिला. सवर्ण समाज में आक्रोश एक्ट को लेकर साफ तौर पर देखने को मिला. शांतिपूर्ण तरीके से बंद रहा, कही किसी प्रकार की अप्रिय घटना नही हुई. सुबह से ही व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखे, जिसके चलते व्यापार दोपहर तक पूरी तरह से ठप्प रहा. पहले से ही लोगो को पता था कि रविवार को रीवा बंद रहेगा, जिसके चलते शहर की सडक़ो में लोगो की भीड़ कम रही. एक दिन पूर्व ही रीवा बंद की अपील की गई थी परिणाम स्वरूप व्यापारियों ने दुकान बंद रखी. शाम चार बजे तक दुकानो के शटर गिरे रहे, शाम को दुकाने खुली. हालत यह थी कि चाय-पान की दुकाने तक बंद थी. यूजीसी काले कानून के विरोध में सभी सवर्ण समाज के संगठन एकजुट होकर विरोध करने सडक़ पर उतरे. युवाओ की टोली कालेज चौराहा से नारेबाजी करते हुए शिल्पी प्लाजा पहुंची और इस काले कानून का जमकर विरोध किया और कहा कि काला कानून वापस लिया जाय. शहर में युवाओं की टोली घूमती रही, लिहाजा शिल्पी प्लाजा, फोर्ट रोड़, सर्राफा बाजार, व्यंकट बाजार, अमहिया बाजार सहित सभी जगह दुकाने बंद रही. शहर में बंद का व्यापक असर देखने को मिला. चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी सभी चौराहो पर पुलिस बल तैनात था ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो. ढ़ेकहा से लेकर रतहरा तक दुकाने बंद रही. यूजीसी काले कानून के विरोध में जिस तरह से व्यापारियों ने सहयोग किया उसके लिये सभी का आभार व्यक्त किया गया.
ये रहे मौजूद
रीवा बंद आंदोलन में विभिन्न संगठनो के पदाधिकारी मौजूद रहे. सामाजिक कार्यकर्ता बी.के माला, सुधीर पाण्डेय, अशोक मिश्रा, मोहित चौबे, आशीष तिवारी, विकास सिंह, स्वतंत्र शर्मा, तनुज त्रिपाठी, अजय पाण्डेय, देवेन्द्र सिंह, करूणा तिवारी, जयप्रकाश पाण्डेय, पुनीत सिंह, रामप्रकाश द्विवेदी, मंगलेश पाण्डेय, अखिलेश शुक्ला सहित करणी सेना के पदाधिकारी शामिल रहे.
