जब-जब धर्म की हानि होती भगवान लेते हैं अवतार

सीहोर। संसार में पुण्य कार्य करने चाहिए. पुरुषार्थ प्राप्त करने भगवान की आराधना करनी चाहिए. इससे भक्ति में वृद्धि होती है. भागवत अज्ञान से ज्ञान और सत्य की ओर ले जाने वाली है. संसार के प्राणी अनेक चीजों से पीडि़त है, उसका एक ही समाधान है कथा का श्रवण करना.

उक्त विचार चमत्कालेश्वर महादेव समिति के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन जगदगुरु पं. अजय पुरोहित ने भगवान विष्णु के 24 अवतारों के बारे में बताया.

उन्होंने परिक्षित और सुखदेव के बारे में बताते हुए कहा कि कलयुग आगमन के समय पांडव के वंशज परीक्षित को सुखदेव ने भागवत सुनाई थी. इसके बाद ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई. यहां से मोक्ष की प्राप्ति के लिए भागवत सुनाने का प्रचलन शुरू हुआ. उन्होंने कहा कि जब धर्म की हानि होती है तो ईश्वर अवतार लेकर पृथ्वी को पापियों से मुक्त कराते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं.

जगद्गुरु ने कहा कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा. कई संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था. भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं. भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए. भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में नित्य ही माखन चोरी लीला करते हैं. मां यशोदा के बार-बार समझाने पर भी श्रीकृष्ण नहीं मानते हैं तो मां यशोदा ने भगवान को रस्सी से बांधना चाहा पर भगवान को कौन बांध सकता है.

 

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