सिक्सलेन निर्माण में मौत ने बुना जाल, मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

उज्जैन: सिंहस्थ के मद्देनजर इंदौर से उज्जैन तक फोरलेन को सिक्सलेन में तब्दील किया जा रहा है, ऐसे में शनिवार को शांति पैलेस चौराहे पर निर्माणधीन सिक्सलेन के अंतर्गत बन रहे फ्लाइओवर के जाल में एक मजदूर के गिरने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई. जिला प्रशासन ने 4 लाख का मुआवजा दिया है. ठेकेदार कम्पनी को दुर्घटना पर नोटिस जारी होगा.सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के नाम पर चल रहे करोड़ों के निर्माण कार्य एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं. शांति पैलेस चौराहे पर निर्माणाधीन फ्लाइओवर पर काम कर रहा झारखंड निवासी मजदूर अशोक दोपहर करीब 1 बजे संतुलन बिगड़ने से नीचे लोहे के सरियों पर गिर गया.

गिरते ही वह सरियों में बुरी तरह फंस गया. मौके पर अफरा-तफरी मच गई. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अशोक को बाहर निकालने के लिए सरियों को गैस कटर से काटना पड़ा. गंभीर हालत में एम्बुलेंस से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. सूचना मिलते ही एसडीएम पवन बारिया और नीलगंगा टीआई तरूण कुरील-नानाखेड़ा टीआई नरेद्र यादव दल बल के साथ मौके पर पहुंचे. प्रशासन ने मामले को जांच में लिया है. मृतक मजदूर के परिजनों को चार लाख रुपए की सहायता राशि तत्काल मंजूर की गई. बावजूद इसके यह मदद उन सवालों के जवाब नहीं देती, जो इस हादसे के बाद उठ खड़े हुए हैं.

30 हजार करोड़ के काम, सुरक्षा पर सवाल
उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर करीब 30 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य चल रहे हैं. शहर और आसपास की दर्जनों साइटों पर हजारों मजदूर काम कर रहे हैं. इंदौर से उज्जैन तक करीब 45 किलोमीटर लंबी सिक्स लेन सड़क पर ही झारखंड से दो दर्जन से ज्यादा मजदूर लगाए गए हैं. घटनास्थल पर जन चर्चा रही कि जिस दर्दनाक दुर्घटना में मजदूर की मौत हो गई, ऐसे में यह जांचा जाना चाहिए कि क्या इन मजदूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं, ऊंचाई पर काम के दौरान सेफ्टी बेल्ट, नेट और गार्ड रेल की व्यवस्था क्यों नहीं रही, क्या मजदूरों का बीमा कराया गया है या नहीं, अस्थायी मजदूर होने के बावजूद क्या उन्हें कलेक्टर रेट के अनुसार मजदूरी मिल रही है, साइट पर कितने मजदूर काम कर रहे हैं, इसकी नियमित मॉनीटरिंग कौन कर रहा है.

ठेकेदार कम्पनी और विभाग जिम्मेदार
घटना की सूचना मिलते ही उज्जैन जिला प्रशासन की टीम कलेक्टर रोशन सिंह के निर्देश पर मौके पर पहुंची. बावजूद इसके मजदूर को बचाया नहीं जा सका. झारखंड के बाकी मजदूरों ने कहा कि ये हादसा सिर्फ एक मजदूर की मौत नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है. अगर समय रहते ठेका लेने वाली कंपनियों, संबंधित सरकारी एजेंसियों और निगरानी अधिकारियों से जवाबदेही तय नहीं की गई, तो ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति होती रहेगी. जिला प्रशासन द्वारा दी गई सहायता राशि संवेदना का संकेत हो सकती है, उससे ज्यादा जरूरी है कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए. विकास तभी सार्थक है, जब उसे बनाने वाले हाथ सुरक्षित हों.

मॉनीटरिंग जरूरी
उज्जैन में सिक्स लेन फ्लाइओवर से गिरकर हुई मजदूर की मौत ने यह साफ कर दिया है कि अगर मॉनीटरिंग और सुरक्षा उपायों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो विकास की यह दौड़ और भी जिंदगियां निगल सकती है.

कम्पनी को नोटिस
एमपीआरडीसी इंदौर की निगरानी में सिक्सलेंन का निर्माण किया जा रहा है. उदयपुर की कम्पनी रवि इंफ्रा ने 1692 करोड़ में ये ठेका लिया है. 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. इस सड़क का भूमिपूजन राष्ट्रपति महामहिम द्रोपदी मुर्मू ने 19 सितंबर 2024 को उज्जैन में किया था. शनिवार जिस हादसे में मजदूर की मौत हो गई ऐसे में लापरवाही बरते जाने पर एमपीआरडीसी द्वारा ठेकेदार कम्पनी को नोटिस जारी किया जाएगा

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