
जबलपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी के न्यायिक सदस्य श्यो कुमार सिंह व एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की युगलपीठ ने पूर्व में जारी आदेशों को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश भर में नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन कर स्थायी निर्माणों को हटाया जाए। एनजीटी ने कहा कि इस क्षेत्र में स्थायी निर्माणों पर रोक लगे। अधिकरण ने प्रमुख सचिव पर्यावरण को निर्देश दिए कि सभी जिलों के संबंधित विभागों, एजेंसियों, नगर निगम आयुक्त व कलेक्टर से आदेश पालन की रिपोर्ट एकत्र करें। प्रमुख सचिव को तीन माह के भीतर पूरी रिपोर्ट एनजीटी के सचिव को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
जनहित याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के अध्यक्ष डा. पीजी नाजपांडे ने एनजीटी के समक्ष एक आवेदन पेश कर बताया पिछले तीन वर्षों में नर्मदा के बाढ़ क्षेत्रों का सीमांकन नहीं हुआ और वहां के अतिक्रमण नहीं हटाए गए हैं। जनहित याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रतीक जैन ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पूर्व आदेश के बावजूद नर्मदा किनारे से डेयरियां नहीं हटने से नदी में गंदगी जा रही है। एनजीटी ने सख्त निर्देश दिये कि नर्मदा, परीयट तथा गौर के किनारे स्थापित डेयरीयों को हटाकर उन्हें नई जगह पर बसाया जाये, ताकि नदी में गंदगी नहीं जा सके। अधिकरण ने यह भी कहा कि नदी से 100 मीटर के दायरे में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। एनजीटी ने डेयरी संबंधी कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी कलेक्टर को सौंपी है। अवगत कराया गया कि परियट किनारे 40, गौर किनारे 12 तथा नर्मदा नदी के किनारे 25 डेयरियां पाई गई थीं।
जबलपुर में चार एसटीपी बंद –
इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जबलपुर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर शहर में स्थापित 16 एसटीपी में से 12 कार्यरत हैं, जबकि चार बंद हैं। ललपुर, उमाघाट, गौरीघाट, रानीताल तालाब तथा गुलौआ तालाब के एसटीपी बंद पड़े हैं।
