
मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच 8 फरवरी को प्रस्तावित ऐतिहासिक पुनर्मिलन अब टल गया है। अजित पवार के असामयिक निधन के बाद पार्टी के भीतर चल रही एकीकरण की पूरी प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों गुटों के बीच महीनों से जारी बातचीत अंतिम चरण में थी और जिला परिषद चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की पूरी तैयारी कर ली गई थी।
एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ विधायक जयंत पाटिल और पार्टी प्रमुख शशिकांत शिंदे ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के विलय को लेकर सहमति लगभग बन चुकी थी। मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल, संगठनात्मक ढांचे और आगामी चुनावों में संयुक्त रणनीति पर अनौपचारिक सहमति भी बन गई थी। 8 फरवरी को इस एकीकरण की सार्वजनिक घोषणा की जानी थी, जिसे पार्टी के इतिहास का अहम मोड़ माना जा रहा था।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में दोनों गुटों के नेताओं के बीच लगातार बैठकें हुई थीं। 16 जनवरी को जयंत पाटिल के आवास पर और 17 जनवरी को शरद पवार के घर हुई बैठक में एकीकरण की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया था। हालांकि, अजित पवार के निधन के बाद बदली राजनीतिक परिस्थितियों ने इस प्रक्रिया को तत्काल रोक दिया है।
अजित पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी गुट वर्तमान में सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा है, जबकि एनसीपी (एसपी) महा विकास अघाड़ी में शामिल है। ऐसे में प्रस्तावित पुनर्मिलन से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना बन रही थी, लेकिन अब यह पूरी कवायद अनिश्चितता के दौर में चली गई है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि एकीकरण की मूल राजनीतिक प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले सभी पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। फिलहाल, 8 फरवरी को होने वाला ऐतिहासिक पुनर्मिलन टल चुका है और एनसीपी की आगे की राह अब नए सिरे से तय होगी।
