सतना :विद्यार्थियों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सतना जिले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गुरुवार को शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सतना में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स (DTF) समिति की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने की। बैठक में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कई ठोस और व्यावहारिक निर्णय लिए गए।
सीईओ श्री सिंह ने सभी सरकारी तथा गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में प्रति 500 विद्यार्थियों पर कम से कम एक या दो पेशेवर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य करने के निर्देश दिए। जहां स्थायी काउंसलरों की व्यवस्था नहीं हो पाती, वहां वरिष्ठ प्रोफेसरों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो जिला स्तर पर मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के विशेषज्ञों से सहायता लेंगे। प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में ‘हेल्थ क्लब’ का गठन किया जाएगा।
परिसरों में ‘एंटी-सुसाइडल टूल्स’ की व्यवस्था और निरंतर ‘एंटी-सुसाइडल अवेयरनेस कैंपेन’ चलाए जाएंगे।परीक्षा परिणाम घोषणा के दौरान छात्रों में बढ़ने वाले अवसाद को देखते हुए, परिणाम चाहे जो भी हो, ऑनलाइन और ऑफलाइन मोटिवेशनल सत्र आयोजित किए जाएंगे। टेली मानस, उमंग तथा कैंपस हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा।प्रवेश प्रक्रिया के दौरान छात्रों की प्रारंभिक काउंसलिंग अनिवार्य होगी।अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय के लिए नियमित ‘पैरेंट-टीचर मीटिंग’ पर विशेष जोर दिया जाएगा।
प्राइवेट कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिसमें शिकायत पेटी, शिकायत निवारण समिति और काउंसलर की नियुक्ति भी बाध्यकारी होगी। सभी संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी काउंसलिंग, बैनर और सूचनाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी।बैठक में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. एस.सी. राय, समिति सचिव डॉ. मनीष प्रताप सिंह (नोडल अधिकारी एन.टी.एफ.), श्रीमती कंचन श्रीवास्तव, श्याम किशोर द्विवेदी, धर्मेंद्र सिंह परिहार, डॉ. निशत फातिमा, डॉ. अमर सिंह चंदेल, श्रीमती कमला अग्रवाल, डॉ. शरद दुबे सहित विभिन्न समितियों के संयोजक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
