मुंबई/दिल्ली | भारतीय राजनीति के लिए पिछला एक साल विमान हादसों के लिहाज से बेहद काला रहा है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की आज हुई दुखद मौत ने सात महीने पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। इससे पहले 12 जून, 2025 को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी का निधन भी अहमदाबाद से लंदन जाते समय एक विमान दुर्घटना में हो गया था। इन दो बड़ी घटनाओं ने नेताओं की हवाई सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक और चिंता का माहौल है।
भारत ने अब तक अपने कई अनमोल रत्न आसमान की इन त्रासदियों में खोए हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो बलवंतराय मेहता (1965), वाईएस राजशेखर रेड्डी (2009) और डोरजी खांडू (2011) ऐसे मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने पद पर रहते हुए विमान या हेलीकॉप्टर हादसों में अपनी जान गंवाई। वाईएसआर रेड्डी की लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके निधन की खबर सुनकर कई समर्थकों ने प्राण त्याग दिए थे। वहीं, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता का विमान 1965 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा मार गिराया गया था।
अजित पवार के हादसे ने ग्वालियर के महाराजा माधवराव सिंधिया और संजय गांधी की यादें भी ताजा कर दी हैं। 2001 में कानपुर जाते समय मैनपुरी के पास हुए क्रैश में सिंधिया का निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। वहीं, 1980 में इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी की मौत ने पूरे गांधी परिवार को झकझोर दिया था। इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी भी 2002 में हेलीकॉप्टर क्रैश का शिकार हुए थे। आसमान में हुई इन त्रासदियों ने समय-समय पर भारत के उभरते नेतृत्व को हमसे छीनकर देश की दिशा और दशा बदल दी है।

