दहेज मांग के लिए क्रूरता साबित करना आवश्यक

जबलपुर: हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दहेज मांग के लिए क्रूरता साबित करना आवश्यक है। अभियोजन पक्ष के गवाह क्रूरता साबित नहीं कर पाते है तो आरोपी को सजा से दंडित नहीं किया जा सकता है। युगलपीठ ने दहेज हत्या के अपराध में आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ सरकार की तरफ से दायर की गयी अपील को खारिज कर दिया।

सरकार की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि डिंडौरी जिला न्यायालय ने अनावेदक को धारा 304 बी तथा धारा 498 ए के तहत दोषमुक्त किये जाने को चुनौती दी थी। सुनीला से रणजीत सिंह से जून 2020 में प्रेम विवाह किया था। शादी के एक साल के अंदर ही पति के साथ हुए कथित झगडे के बाद उसने 29 अप्रैल 2021 को आत्महत्या करने खुद को आग लगा ली थी और अगले दिन उसकी उपचार के दौरान मौत हो गयी। पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। डिंडौरी न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए आरोपी पति को दोषमुक्त कर दिया था।
युगलपीठ ने प्रकरण का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन गवाह तथा मृतिका की बहन ने स्वीकार किया कि दोनों में प्रेम विवाह किया था। आरोपी के तरफ से कोई दहेज की मांग नहीं की गयी थी। ससुराल पक्ष के द्वारा आरोपी को ऑटो सुधरवाने के लिए 16 हजार रुपये दिये थे। मृतिक की मॉ ने भी इसी प्रकार के बयान दिये थे। उन्होने अपने बयान में कहा था कि सुनीला विवाह से पूर्व लगभग 9 माह तक आरोपी के साथ लव रिलेष्वनशिप में थी। वह दोनो के विवाह से खुश नहीं थी, बाद में उसने शादी के लिए सहमति व्यक्त कर दी। उसके भाई ने भी अपने बयान में कहा था कि नौकरी के कारण वह भोपाल में था और वह बहन की शादी में शामिल नहीं हुआ था।

उन्होने स्वीकार किया कि उनके समाज में पारिवारिक विवाद के लिए पंचायत बुलाई जाती थी। शादी के बाद से विवाद के संबंध में कोई पंचायत नहीं बुलाई गयी थी और पुलिस में भी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण हार्ट फेलियर था। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि एक बार जब अभियोजन के गवाहों ने दहेज या दहेज की मांग से जुड़ी क्रूरता साबित नहीं की, तो आरोपी को सज़ा नहीं हो पाती। जिला न्यायालय ने अपने फैसले में कोई गलती नहीं की है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

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