
ब्यावरा। केन्द्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले यूजीसी कानून को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है, मंगलवार को जिले के अनेक स्थानों पर रैली निकालकर ज्ञापन सौंपते हुए यूजीसी कानून को वापस लेने की पुरजोर मांग की गई.
यूजीसी कानून के विरोध में व्यापक प्रदर्शन शुरु हो गये है. मंगलवार को ब्यावरा, नरसिंहगढ़, सारंगपुर, पचोर में इसका विरोध किया गया.सवर्ण समाज द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुए रैली निकालकर ज्ञापन सौंपे गये. प्रदर्शन में समाजजन, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए.
उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताया
प्रदर्शनकारियों के द्वारा इसे काला कानून बताते हुए तुरंत वापस लेने की मांग की जा रही है. सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित यूजीसी कानून देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. उन्होंने इस कानून को शिक्षा और छात्रों के हितो के खिलाफ बताया.कानून के लागू होने से विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्ता समाप्त हो जायगी. इससे संस्थानों के स्वतंत्र निर्णय लेन की क्षमता प्रभावित होगी. शिक्षा का स्तर गिरने की आशंका है. अत: यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाये. इसे लागू नहीं किया जाये. लोगों के द्वारा एकजुटता दिखाते हुए सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की गई है, साथ ही कहा है कि यदि सरकार ने उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाकर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. कहा जा रहा है कि नए नियम कॉलेज, यूनिवर्सिटी कैंपसों में भेदभाव को बढ़ावा दे सकते है. इससे कॉलेजो में अराजकता पैदा होगी.
यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों
यूजीसी ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था. इसका नाम है प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीटयूशन रेगुलेशन्स 2026. इसके तहत कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाति आाधरित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्प लाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए गये है. ये टीमें खासतौर पर एससी, एसटी, ओबीसी छात्रों की शिकायतों को देखेंगी. सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए है.
क्या है यूजीसी के नियम
हर कॉलेज में ईक्वल अपॉच्र्यूनिटी सेंटर (ईओसी) बनेगा, ईओसी पिछड़े और वंचित छात्रों को पढ़ाई, फीस और भेदभाव से जुड़ी मदद देगा, हर कॉलेज में इक्वलिटी कमेटी (समता समिति) बनानी होगी, इस कमेटी के अध्यक्ष कॉलेज के प्रमुख होंगे, कमेटी में एससी, एसटी और ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग शामिल होंगे. कमेटी का कार्यकाल 2 साल रहेगा.
कॉलेज में एक इक्वलिटी स्क्वाड भी बनेगा जो भेदभाव पर नजर रखेगा. भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में मीटिंग जरुरी होगी. 15 दिन में रिपोर्ट कॉलेज प्रमुख को देनी होगी. कॉलेज प्रमुख को 7 दिन में आगे की कार्यवाई शुरु करनी होगी. कॉलेज को जातीय भेदभाव पर हर साल यूजीसी को रिपोर्ट भेजनी होगी. यूजीसी राष्ट्रीय निगरानी कमेटी बनाएगा. नियम तोडऩे पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है, कॉलेज के डिग्री, ऑन लाइन और डिस्टेंस कोर्स पर रोक लग सकती है तथा गंभीर मामलों में यूजीसी की मान्यता भी रद्द हो सकती है.
यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में प्रदर्शन
नरसिंहगढ़। यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में नगर में भी विरोध प्रदर्शन हुआ. विभिन्न सवर्ण संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा.
इन गाइडलाइंस को उच्च शिक्षा व्यवस्था, अकादमिक स्वतंत्रता एवं अभिव्यक्ति की आजादी के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि इसमें सुनवाई, प्रमाण और निष्पक्षता की अनदेखी की गई है. यूजीसी की नई गाइडलाइंस पर तत्काल रोक लगाई जाए, स्वतंत्र एवं संसदीय समिति से पुनरीक्षण कराया जाए, शिकायत निवारण प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने तथा शिक्षकों-छात्रों की अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा सुनिश्चित की जाए. इस मौके पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, युवा मौजद रहे.
