कविता कृष्णमूर्ति ने 8 साल की उम्र में संगीत का सफर शुरू किया और अपनी मखमली आवाज़ से बॉलीवुड को अमर गीत दिए। प्रोफेशनल कामयाबी के साथ उनकी निजी जिंदगी भी मिसाल है।
अपनी मखमली और सुकून देने वाली आवाज से हिंदी सिनेमा को अनगिनत यादगार गीत देने वाली कविता कृष्णमूर्ति सिर्फ एक बेहतरीन गायिका ही नहीं, बल्कि रिश्तों को पूरे दिल से निभाने वाली एक मिसाल भी हैं। ‘साजन जी घर आए’, ‘बोल चूड़ियां’, ‘अलबेला सजन’ और ‘छाया है जो दिल पर’ जैसे सुपरहिट गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं। इन गीतों की भावनाओं को जिस शिद्दत से कविता ने अपनी आवाज़ दी, वही संवेदनशीलता उनकी निजी ज़िंदगी में भी साफ झलकती है।
25 जनवरी 1958 को तमिल परिवार में जन्मीं कविता कृष्णमूर्ति का झुकाव बचपन से ही संगीत की ओर था। महज 8 साल की उम्र में उन्होंने यह साबित कर दिया था कि संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। अपनी आंटी की सलाह पर उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया और बलराम पुरी से संगीत की विधिवत शिक्षा ली। कम उम्र में ही उन्होंने मंच पर परफॉर्म कर पुरस्कार जीत लिए। धीरे-धीरे संगीत उनके लिए जुनून बन गया और अपने सपनों को उड़ान देने के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया।
