
ब्यावरा। एक बार फिर ठंड के प्रकोप, सर्द हवाओं ने कंपकपा दिया. एक ही दिन में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री नीचे जा लुढका. शनिवार की सुबह ठंडी हवाओं के बीच ठंड के जोर ने परेशानी बढ़ा दी है, ठंड के प्रकोप ने बेसहारा गौवंश पर एक बार फिर संकट खड़ा कर दिया है. शनिवार को विभिन्न जगहों पर 7 गौवंश ने दम तोड़ दिया.
गौरतलब है कि विगत कुछ दिन से ठंड का प्रभाव कमजोर होने लगा था. परन्तु शुक्रवार की रात्रि से ही ठंड ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया. शनिवार सुबह से ही सर्द हवाएं चलने लगी. मौसम विभाग के अनुसार 23 जनवरी को जिले का न्यूनतम तापमान 13.5 डिग्री था जो 24 जनवरी को 7.4 डिग्री पर जा पहुंचा.
ठंड का प्रकोप सहन नहीं कर पा रहे बेसहारा गौवंश
ठंड के बढ़े प्रकोप ने एक बार फिर बेसहारा गौवंश पर संकट खड़ा कर दिया है. शनिवार की सुबह स्थानीय गौशाला से 3 गाये, 1 गाय कैलाश ऑयल मील क्षेत्र, 1 विनायक नगर, 1 गाय श्रीराम कॉलोनी राजगढ़ रोड से मृत अवस्था में मिली. कड़ाके की ठंड बेसहारा गौवंश की मौत का कारण बन रही है. इसके पूर्व 5 जनवरी को कड़ाके की ठंड से 7 गौवंश ने दम तोड़ दिया था.
अलाव के आसपास आ जाते है गौवंश
ठंड के प्रकोप का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चौराहों, सडक़ो पर जलने वाले अलाव के आसपास गौवंश आकर खड़े हो जाते है ताकि ठंड से राहत मिल सके. अधिकांश जगह अलाव के आसपास गौवंश को खड़े हुए देखा जा सकता है. खासकर खुले आसमान के नीचे रहने वाले बेसहारा गौवंश के लिए कड़ाके ठंड मुसीबत बनी हुई है.
बीमार, कमजोर गौवंश पर अधिक प्रभाव
जो गौवंश बीमार या फिर अत्यधिक कमजोर अवस्था में होते है उन पर कड़ाके की ठंड का प्रभाव कहीं अधिक होता है. शीत लहर के साथ ठंड का काफी जोर बीमार एवं कमजोर गौवंश के लिए जानलेवा साबित होता है.
बेसहारा गौवंश का नहीं कोई ठोर ठिकाना
नगर सहित जिले भर में एक लाख से अधिक बेसहारा गौवंश खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है, कड़ाके की ठंड इनके लिए जानलेवा बन जाती है, ठंड से किसी तरह का कोई बचाव नहीं होने से आये दिन विशेषकर बीमार एवं कमजोर गौवंश दम तोड़ देते है.
