बेंगलुरु, 23 जनवरी (वार्ता) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता राजीव गौड़ा के खिलाफ दर्ज उस आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन पर एक महिला नगर आयुक्त को अपशब्द कहने और उसे धमकाने का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अपने आधिकारिक कर्तव्य का पालन कर रही एक महिला लोक सेवक के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना औपचारिक जांच का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी कर्तव्यों का पालन करने वाले लोक सेवक को डराने या गाली देने का अधिकार नहीं है।
यह विवाद ‘कल्ट’ नामक एक कन्नड़ फिल्म के प्रचार से जुड़ा है। आरोप है कि 13 जनवरी को एक प्रचार कार्यक्रम से पहले यहां शिदलगट्टा के नेहरू स्टेडियम और आसपास के इलाकों में बैनर और फ्लेक्स लगाए गए थे, जिससे यातायात बाधित हो रहा था। नगर आयुक्त जी. अमृता ने सुरक्षा जोखिम और यातायात में बाधा को देखते हुए इन बैनरों को हटवा दिया था। इसके बाद गौड़ा ने कथित तौर पर अधिकारी को फोन किया और उनके खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अदालत ने याचिका की जांच के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह शिकायत बीएनएस की धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के तहत अपराध का खुलासा करती है। न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि एक पूर्व जनप्रतिनिधि से संयम बरतने की अपेक्षा की जाती है, खासकर जब वह किसी महिला लोक सेवक को संबोधित कर रहे हों।
