जनरल द्विवेदी को बार-बार याद आता है वह क्षण, जब उन्हें पहलगाम आतंकवादी हमले की जानकारी दी गयी

नयी दिल्ली 22 जनवरी (वार्ता) सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि वह उस क्षण को भूल नहीं पाते जब उन्हें पिछले वर्ष जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा 26 निर्दोष नागरिकों की नृशंस हत्या की सूचना मिली थी।

जनरल द्विवेदी ने गुरुवार को यहां एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान उस घटना को याद करते हुए बताया कि वह सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों के एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे तभी भाषण के बीच उन्हें यह दुखद समाचार दिया गया।

उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद जब भी वह मंच पर खड़े होते हैं उन्हें उस दिन की याद आ जाती है। सेना प्रमुख ने कहा, “22 अप्रैल को मैं सेवानिवृत्त अधिकारियों के सेमिनार में बोल रहा था… मैं अपने संबोधन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा पूरा कर चुका था और अचानक उस समय के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई अंदर आए और बोले, सर, छोटा सा।”

उन्होंने कहा, “जब डीजीएमओ ‘छोटा सा’ कहते हैं, तो आप समझ सकते हैं जब वे आपके भाषण के बीच में आकर कुछ कहना चाहते हैं, तो जरूर कोई बड़ी बात होती है। इसके बाद आप जानते ही हैं कि क्या हुआ, और वह समय बहुत कठिन था। उस समय तत्कालीन उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एम. वी. सुचेंद्र कुमार भी वहां बैठे थे क्योंकि वे भी उसी महीने 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे थे।” जनरल द्विवेदी ने कहा, “उन्होंने मेरी ओर देखा, मैंने उनकी ओर देखा और वे समझ गए। उसी समय वे तुरंत बाहर चले गए, क्योंकि तब तक उन्हें भी एक पर्ची के जरिए यह सूचना मिल चुकी थी कि क्या हुआ है। इसके बाद जो हुआ, वह आप सभी जानते हैं। इसलिए जब भी मैं मंच पर खड़ा होता हूं, तो मुझे हमेशा उस दिन की याद आ जाती है कि हालात कैसे थे और चीजें कितनी तेजी से बदलीं।”

22 अप्रैल को एम 4 कार्बाइन और एके-47 से लैस आतंकवादियों ने जो पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़े थे, पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछने के बाद 25 पर्यटकों और एक घोड़े वाले की हत्या कर दी थी।

यह हमला पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के भड़काऊ बयानों के कुछ ही दिनों बाद हुआ था, जिनमें उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘जुगुलर वेन’ बताया था और मुसलमानों तथा हिंदुओं के साथ अलग-अलग व्यवहार की बात कही थी।

इसके जवाब में, पखवाड़े भर बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित नौ आतंकवादी शिविरों को नष्ट कर दिया। इस अत्यंत गोपनीय अभियान में भारतीय रक्षा बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नौ आतंकवादी शिविरों पर सटीक हमले किए।

इनमें बहावलपुर स्थित मरकज़ सुभान अल्लाह – जैश-ए-मोहम्मद, मुरिदके स्थित मरकज़ तैयबा – लश्कर-ए-तैयबा, सरजल, तेहरा कलां – जैश-ए-मोहम्मद, महमूना जॉयया, सियालकोट – हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन, मरकज़ अहले हदीस, बरनाला – लश्कर-ए-तैयबा, मरकज़ अब्बास, कोटली – जैश-ए-मोहम्मद, मस्कर रहील शहीद, कोटली – हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन, शवई नाला कैंप, मुज़फ्फराबाद – लश्कर-ए-तैयबा और सैयदना बिलाल कैंप, मुज़फ्फराबाद – जैश-ए-मोहम्मद शामिल थे।

 

 

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