नई दिल्ली, 22 जनवरी (वार्ता) भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी इंडिया) ने बजट में विनिर्माण करोबार में लगीं एमएसएमई क्षेत्र की गैर-कॉरपोरेट इकाइयों के लिए आयकर दर घटाकर 25 प्रतिशत करने तथा जीएसटी रिफंड का 90 प्रतिशत तुरंत जारी करने की सिफारिश की है।
संस्था की राय में एमएसएमई क्षेत्र की ऐसी इकाइयों के लिए कर की दर कम होने से प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के समान लाभ मिलेगा।
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा, “हमने साझेदारी, एलएलपी या एकल स्वामित्व के रूप में संचालित विनिर्माण एमएसएमई के लिए आयकर दर को घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि उन्हें प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के बराबर लाया जा सके। इसके साथ ही, हमने जीएसटी रिफंड का 90 प्रतिशत तुरंत जारी करने और शेष 10 प्रतिशत सत्यापन के बाद देने का सुझाव दिया है।”
वर्तमान में गैर-कॉरपोरेट विनिर्माण क्षेत्र के सूक्षम, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) लगभग 33 प्रतिशत कर (30 प्रतिशत कर के साथ सरचार्ज और सेस) का भुगतान करते हैं, जिससे उन्हें कॉरपोरेट के रूप में पंजीकृत विनिर्माताओं की तुलना में 8–9 प्रतिशत का नुकसान होता है।
ईईपीसी इंडिया ने गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि माल एवं सेवा कर ( जीएसटी) रिफंड जल्द होने और 90 प्रतिशत रिफंड तुरंत मिलने से काम के लिए धन की उपल्ब्धता बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और निर्यात गतिविधियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन में लगी इस शीर्ष संस्था ने विनिर्माण एमएसएमई को रूफटॉप सोलर में निवेश पर वर्तमान 20 प्रतिशत के बजाय 100 प्रतिशत मूल्यह्रास (डिप्रिसिएशन) की अनुमति मांगी है। श्री चड्ढा ने कहा, ” इससे हरित ऊर्जा को अपनाने को प्रोत्साहन मिलेगा, एमएसएमई की बिजली लागत कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट में कमी आएगी।”
