भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देश प्रयासरत

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (वार्ता) भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता ‘लगभग पूरा हो चुका है’ लेकिन कृषि व्यापार पर फंसे पेंच को सुलझाने के लिए नौकरशाह और व्यापार विशेषज्ञ रात-दिन काम कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

अधिकारियों ने कहा, “अमेरिका की ओर से भारत को ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण देने से व्यापार समझौते को अतिरिक्त गति मिली है…हम इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में देखते हैं और यह व्यापार मामलों पर मतभेदों को दूर करने में मदद कर सकता है… लेकिन निश्चित रूप से, वे सख्त मोलभाव करने वाले हैं और हम बातचीत जारी रखेंगे।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में दोनों के बीच प्रस्तावित इस समझौते को ‘एक अच्छा समझौता’ बताते हुए इसके सफल होने की भविष्यवाणी की थी। दोनों पक्षों की ओर से दर्शाए जा रहे सकारात्मक रुख को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही यह बड़ी सफलता संभव होने वाली है।

‘पैक्स सिलिका’ पिछले साल दिसंबर में शुरू किया गया एक रणनीतिक गठबंधन है, जिसका उद्देश्य चीन के प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना है। भारत को अगले महीने पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।

विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के पूर्व सचिव पिनाक आर. चक्रवर्ती ने कहा, “हम कई मुद्दों पर सहमत हुए हैं, लेकिन मतभेद अभी भी बने हुए हैं।” व्यापार वार्ताकारों ने कहा कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक चिकित्सा उपकरणों पर सहमति बनी है।

भारत ने भी बदले में अमेरिकी रक्षा उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच प्रदान करने, उनके कई उच्च-स्तरीय कृषि उत्पादों पर शुल्क कटौती करने पर सहमति जताई है। इसके अतिरिक्त भारत ने अमेरिकी तेल को खरीदने के लिए अलग से एक समझौते की भी पेशकश की है और रूस से तेल की खरीद को कम करने का भी संकेत दिया है।

कभी विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वार्ताओं का हिस्सा रहे भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के पूर्व प्रोफेसर बिस्वजीत धर ने कहा, “जहाँ हम फंसे हुए हैं वह कृषि आयात शुल्क है, वे हमारे खाद्यान्न बाजार में प्रवेश करना चाहते हैं। गेहूं, चावल… और साथ ही हमारे डेयरी क्षेत्र में। हम उन लाखों छोटे किसानों की आजीविका की रक्षा करना चाहते हैं, जो इन फसलों और उत्पादों पर निर्भर हैं।”

अमेरिकी सरकारी आंकड़ों और आर्थिक अनुमानों के अनुसार, 2025 के दौरान आयात शुल्क अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने अमेरिका को लगभग 100 अरब डॉलर मूल्य का सामान बेचा, जबकि 2024 में यह 87.34 अरब डॉलर था। कैलेंडर वर्ष 2024 में भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 45 अरब डॉलर से अधिक था, जो 2025 में 50 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।

श्री चक्रवर्ती और श्री धर के साथ-साथ इस उच्च-स्तरीय व्यापार वार्ता में शामिल अधिकारियों का मानना था कि दालों, कुछ डेयरी और कृषि उत्पादों पर प्रस्तावित आयात शुल्क कटौती और ड्रोन, हाई-टेक जेट लड़ाकू विमानों और रडार प्रणालियों की रक्षा खरीद इस घाटे को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होगी, लेकिन ‘पूरी तरह से नहीं’।

इससे पहले पिछले साल अगस्त में, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया था, जिसके लिए भारत द्वारा प्रतिबंधित रूसी तेल की भारी खरीद को जिम्मेदार ठहराया गया था। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि आयात शुल्क में यह बढ़ोतरी भारत को व्यापार सौदे की शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने का एक प्रयास था।

विश्लेषकों का हालांकि यह भी तर्क है कि लगातार बदल रही वैश्विक व्यवस्था में चीन के साथ वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा के लिए अमेरिका को भारत की जरूरत है, खासकर तब जब अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगी यूरोप के साथ भी उसके संबंध तनावपूर्ण हैं।

दोनों बड़े लोकतंत्रों के बीच संबंध न केवल आयात शुल्क विवाद पर, बल्कि श्री ट्रंप द्वारा पिछले साल भारत-पाकिस्तान के बीच हुई संक्षिप्त भिड़ंत को समाप्त करने का श्रेय लेने पर भी खराब हुए हैं, जबकि भारत का कहना है कि भारतीय मिसाइलों द्वारा कई हवाई अड्डों और रणनीतिक बंकरों को नष्ट किए जाने के बाद पाकिस्तान को समझ आयी थी। स्थिति तब और खराब हो गई जब पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों द्वारा कश्मीर की पहलगाम घाटी में 26 लोगों की हत्या किए जाने के दो महीने से भी कम समय के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया।

श्री चक्रवर्ती ने कहा, “अमेरिका और भारत दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है और उस रिश्ते की बाधाओं को समाप्त करने के लिए रास्ता निकाल लिया जाएगा।”

 

 

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