
छतरपुर। जिले में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी एक आदेश इन दिनों चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। इस आदेश में स्कूलों के प्राचार्यों और प्रधानाध्यापकों को न सिर्फ शैक्षणिक गतिविधियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, बल्कि विद्यालय परिसर में कुत्तों के प्रवेश को रोकने की विशेष जिम्मेदारी भी दी गई है। आदेश सामने आने के बाद शिक्षा जगत में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक स्कूल स्तर पर एक विशेष दल का गठन किया जाना है, जो प्रतिदिन विद्यालय परिसर में कुत्तों की मौजूदगी पर नजर रखेगा और उन्हें स्कूल में प्रवेश से रोकेगा। आदेश का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना बताया गया है, लेकिन शिक्षकों के बीच इस फैसले को लेकर असंतोष भी उभरकर सामने आया है।
शिक्षकों का कहना है कि उनकी मुख्य भूमिका बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। ऐसे में कुत्तों को भगाने या निगरानी करने जैसी जिम्मेदारियां सौंपना उनके कार्यभार को अनावश्यक रूप से बढ़ाता है। कई शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि वे पढ़ाई पर ध्यान दें या फिर परिसर में जानवरों की निगरानी करें। इस आदेश को लेकर सोशल मीडिया और शिक्षक संगठनों में भी बहस छिड़ गई है।
विवाद बढ़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ए.एस. पांडे ने मामले पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि आदेश का मकसद शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव डालना नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। डीईओ ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अस्थायी और एहतियाती कदम के तौर पर लागू की गई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में संबंधित विभागों से समन्वय कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
